मइके के मया के तिहार तीजा

मइके के मया के तिहार तीजा

Gulal Prasad Verma | Publish: Sep, 10 2018 10:55:52 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

संस्करीति

मा इलोगिन के सम्मान अउ उछाह के परब तीजा ह छत्तीसगढ़ अंचल म अलगेच रंग म सराबोर रहिथे। अइसे तो हरतालिका तीज तिहार भारतभर म मनाय जाथे, फे र छत्तीसगढ़ म तीजा ह बड़ेचजान लोक तिहार हरे। तीजा ह मइके के मया के तिहार हरे।
छत्तीसगढ़ के संस्करीति म भादो महीना ह तिहार के महीना आय। तीजा के तीन दिन पहिली पोरा होथे। पोरा के दिन घर के अंगना ल गोबर ले लिपे जाथे। पोरा म नंदी बइला अउ माटी के बने चूल्हा, कहाड़ी, चमचा, पोरा-जांता, सील-लोढ़ा सब्बो के पूजा करे जाथे। वोकर बाद घर के लइका मन पोरा-जांता ले खेलथे। संझाकुन बहू-बेटी, दाईमन ह माता देवाला म पोरा पटकथें अउ अपन सुख-दुख ल बांटथे।
तीजा भादो महीना के अंजोरी पाख म तीज के दिन मनाय जाथे। बिहाव होय माइलोगिनमन ह अखंड सौभाज्य के मनौती बर अउ कुंवारी छोकरीमन बने गोसइया के कामना बर उपास रखथें। पुरान म ए गोठ हाव के पारबती ह संकर भगवान ल पति रूप म पाए बर बनेच तपस्या करे रिहिस। तीजा म मइके लाए के परथा के सेती माइलोगिनमन ल तीजहारिन कहे जाथे। जेन ह ले बर जाथे वोला लेवाल कहे जाथे। तीजा म बेटी अउ बहन ल ददा या भाई के दुवारा मइके लिवा के लाए जाथे। माइके आए के बाद इंकर खुसी के कोनो ठिकाना नइ रहाय। दाई के मया ल पाके बेटीमन ह चिरई असन फु दके बर लग जाथे।
तीजा के पहिली उपसहिनमन करू भात खाथें। ऐमे करेला के साग खाय जाथे। पड़ोसी के घर घलो जाके करू भात खाथं। तीजा के दिन पहाती उठके मौनी इसनान करे जाथे। नीम या सरफोंक के मुखारी करे जाथे। फेर, आठों पहर निरजला उपास रखे जाथे। इही दिन माइलोगिनमन ल सोहारी, ठेठरी, खुरमी, गुछिया, पपची, अइरसा बनाथें। संझाकुन अपन सहेलीमन संग खेल घलो खेलथें। कईझनमन ह रूख म झूलना बांध के झूलथें। रातकुन सिंघाड़ा के पकवा अउ इड़हर के साग रांधे जाथे। जेला दूसर दिन बिहनिया फरारी करे जाथे। रातकिन फुलेरा सजाके सिव अउ पारबती के पूजा करथें।
दूसर दिन पहाती उठके इसनान करके संकर भगवान के पूजा करे जाथे। रातकिन के फु लेरा ल बिसरजित करथें। वोकर बाद बासी खाय के परंपरा हे। तीजा के तीसर दिन तक सहेली या अपन जात बिरादरी म ज्योनार भोज नेवता के घलो परथा हावय। ऐमा दाई-ददा के अलावा दूसरमन ह घलो सुहाग के सामान भेंट दे के परंपरा हे।
तीजा के बेरा म बहिनीमन संग भांचा-भांची घलो आथें। भांचा-भांची ल नवा कपड़ा दे के ममा ह गोड़ छू के जस के भागी बनथे। उहू पायके तीजा के छत्तीसगढ़ म अलगेच महत्व हे।
बस्तर संभाग म मनइया तीजा ह थोरकुन अलगेच रहिथे। बस्तर म तीजा जगार कहे जाथे। ऐमा सिव अउ पारबती के पूजा करे जाथे। इहां के तीजा जगार ह एक दिन, एक हफ्ताा नइते महीनाभर घलो चलथे। इही जगार ल धनकुल जगार घलो कहि दे जाथे। इही तिहार म धनकुल बाजा बजाय जाथे।

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