रायपुर

चांउर के महिमा

खेती-किसानी

रायपुरFeb 27, 2019 / 08:05 pm

Gulal Verma

चांउर के महिमा

छत्तीसगढिय़ामन बर भात-बासी हा जरूरी जिनिस आय, काबर के हमर छत्तीसगढ़ ह धान के कटोरा कहिलाथे। भात-बासी बासी बर चांउर जरूरी होथे। चांउर पिसान के चीला, चौसेला अउ फरा हा सब्बो छत्तीसगढिय़ामन के मन ला अड़बड़ेच भाथे। चांउर हा छत्तीसगढ़ के संग म बंगाल, बिहार, उड़ीसा, आन्ध्रप्रदेश जइसे राजमन के घलो मुख्य भोजन आय। पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महारास्ट राजमन म मुख्य भोजन गहूँ ह आय, फेर थोकिन चांउर खाय बिना वोकरोमन के मन हा नइ माडय़। चांउर ला जम्मो भारत में पसन्द करे जाथय तेखरे सेती भारत कोनो भी सहर म सादा राइस, मसाला राइस, राइस पुलाव, राइस बिरयानी आसानी के साथ मिल जाथे। एसिया के कतकोन देस अइसे हे जिहां के मनखेमन हा दिन म दू से तीन बार तक चांउर खाथें।
म्यांमार म एकझन मनखे हा औसतन 195 किलो अउ कम्बोडिया में 160 किलो चांउर एक साल म खा जाथे। यूरोप के देसमन म चांउर कम खाए जाथे, अमरीका म एकझन मनखे हा औसतन 7 किलो अउ 3 किलो चांउर खाथे। मनखे हा सबसे पहिली चांउरेच के खेती करना सुरू करे रहिस हे। हरप्पा सभ्यता म, जउन हा आज ले करीब पांच हजार साल पुराना सभ्यता ए, चांउर के खेती के परमान मिले हे। जादातर देस में जतका चांउर उगथे, करीब-करीब ओतकेच चांउर खा लिए जाथे। तेखरे कारन संसार के देसमन म उगाए जाने वाला चाँउर के सिरिफ पांच फीसदी चांउर भर के ही निरयात होथे। सबले जादा चांउर के निरयात करने वाला देस थाईलैंड ए जिहाँ ले हर साल पचास लाख टन चाँउर दूसर देसमन म जाथे। वोकर बाद अमरीका के नम्बर आथे जउन हा हर साल तीस लाख टन चांउर के निरयात करथे। अमरीका के बाद विएतनाम हा हर साल बीस लाख टन चांउर निरयात करथे।
हमर देस में जादातर पसन्द करे जाने वाला चांउर के किसिम हे – बासमती, गोविंद भोग, तुलसी भोग, तुलसी अमृत, बादशाह भोग, बिसनुभोग, जवाफूल, एच.एम.टी. आदि। फेर धान के खेती हा अड़बड़ेच मेहनत के काम ए। किसान ला चिखला-माटी म सने भुइंया म नागर अउ बइला के संग में करीब बत्तीस किमी रेंगे बर परथे। धान के पौधामन ला झुके-झुके रोपई ह कनिहा ला तोड़ के रख देथे। तेकरे सेती कहिथन – ‘अपन हाथ म नागर धरे, वो हर जग म खेती करे।Ó
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