अब तक जउन चलत रिहिस वो नइ चलय, सब बदल दूहूं!

अब तक जउन चलत रिहिस वो नइ चलय, सब बदल दूहूं!

Gulal Prasad Verma | Updated: 26 Jul 2019, 04:25:20 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

का-कहिबे...

अ ब ए सब नइ चलय! का सब नइ चलही? इही, जउन अतेक दिन ले चलावत हो। का चलावत हंन? अब मोला का पता हावय के का चलावत रहेव अतेक दिन ले! का चलावत रहेंन, काम करत रहेन। काम करत रहितेव त वोकर तबादला काबर होतिस? वोला तो नइ जानन! फेर, दस बछर म पांच पइत वोकर बदली हो गे हे, त हमन का करन? उही कहत हंव के अब वो सब नइ चलय। मोला परिनाम चाही। परिनाम तो पहिली वाले ह तको चाहत रिहिस, हमन देय घलो रहेन।
मेहा अपन तरीका ले काम करवाथंव। आपमन वो सब बंद करव, जउन अब तक चलत रिहिस। अइसन म त दफतर म ताला लग जही। सबो ल बदले या फेर बंद करे बर परही त सबोझन हाथ म हाथ धरे ठलहा बइठ जाबोन। फेर, काम कइसे होही? काम बंद करे बर नइ काहत हंव। अब तक जउन चलत रिहिस वो नइ चलय, इही बताय बर आपमन ल बलाय हंव। फेर, इहां तो काम अइसनेच होथे। सबो दफतर म काम इही ढंग ले करे जाथे। मोला तो बस इही कहिना हावय के अब तक जउन चलत रिहिस, अब नइ चलय।ठीक हे, फेर आपमन ल बताय बर परही के फेर कइसे काम करन?
पहिली ले आप लोगनमन जउन तय कर रखे हव वोला बंद करव। फेर, नवा ढंग ले काम कर के देखावव। हमन ल अउ कोनो ढंग आबेच नइ करय काम करे के। इही पता नइए के अब तक जउन चलत रिहिस हे वोमा का खराबी हे? जब कोनो काम म खराबी नइये, त फेर वोला बदलबोन काबर? वो सब मेहा नइ जानंव! मोला तो बस अतके पता हावय के अब ए सब नइ चलय। बाकी करमचारीमन ल घलो आपमन समझादव के मोर राहत ले ए सब चलने वाला नइये। अब जावव आपमन। दस बछर ले दफतर म जमे करमचारी ल अइसन बात सुने के ऐहा पांचवां मउका रिहिस। ककरो ले काहीं कुछू कहे-सुने बगैर वोहा उही सब चलाय लगिस, जउन अब तक चलत रिहिस। काबर के काम तो अइसनेच होथे।
घबराय या फेर डरराय के कोनो जरूरत नइये। जइसे सुरु-सुरु म सबे साहेबमन कानून-कायदा झाड़थें, नवा-नवा नियम बनाथें, वोइसनेच ए पइत घलो होवत रिहिस। इही दू-चार दिन तो थोरबहुत तकलीफ उठाय बर परथे। समे म दफतर आय-जाय बर परथे। जेला सबोझन मन लगाके निभाथें। बाकी दिन तो करमचारीचमन के मरजी अउ राज चलथे। दूसर दिन बिहनिया दसबज्जी साहब ह दफतर पहुंच गे, करमचारीमन के आय के टाइमटेबूल देखे बर। हालांकि, हमर इहां टाइम म अवई-जवई ल ओतेक जरूरी नइ समझंय। काबर के दफतर म बिलम ले पहुंचई अउ जल्दी निकलई ल सान समझथें। साहेब के डांट-फटकार के का डर! वोला कोन मार अंगद के गोड़ कस जमे रहिना हे।
सुकरात या फेर ईसा मसीह के बोल म काहंन त, नवा-नवा नियम-कायदा बनइया, अब अइसन नइ चलय कहइया साहेबमन नइ जानंय के वोमन का काहत हें, कतेक बड़ गलती करत हें। सच बात तो ऐहा आय के करमचारीमन म अतेक एकता हे, वोकरमन के संघ म अतेक ताकत हे के साहेबमन ल कोन पूछय, सरकार ल घलो झुका देथें।
कोनो बतावंय के ईमानदारी से मिहनत से काम करे बर कहई म का गलती हे। उम्मीद भर कर सकथन कभु न कभु दफतरमन म अभी जउन चलत हे तउन ह बंद हो जही! काबर उम्मीद म दुनिया कायम हे। सरकारी दफतरमन के 'हालÓ अउ करमचारीमन के 'चालÓ ल देेख-सुन के अउ का-कहिबे।

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