हरेली तिहार ल लेके बगरे हे अंधबिसवास के भरम-भूत!

हरेली तिहार ल लेके बगरे हे अंधबिसवास के भरम-भूत!

Gulal Prasad Verma | Updated: 02 Aug 2019, 05:39:11 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

का-कहिबे...

क हावत हे 'जंगल म मोर नाचिस, कोन देखिसÓ। अइसने कहि सकथव - 'हरेली म टोनही झूपिस, कोन देखिसÓ बतावव! ए माने जाथे के जइसे-जइसे समाज म बिग्यानिक जानकारी बढ़थे, वइसने-वइसने अंधबिसवास ह कमतियावत जाथे अउ जुन्ना भरम, परंपरा, कुरीतिमन ढिल्ला पर जाथे। फेर, हमर छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म अइसन होवत नइ दिखत हावय। कम से कम हरेली अमावस्या म जंतर-मंतर अउ टोना-टोटका के मामला म तो बिलकुलेच नइ।
गांववाले अउ गाय-गरवा ल कोनो देवीय, महामारी या आपदा लेे बचाय के खातिर रातकुन बइगा दुवारा जंतर-मंतर, टोना-टोटका करे के परंपरा म कमी नइ आय हे। बल्कि, अंधबिसवास ह कतकोन रूप म बाढ़त नजर आथे।
अइसे हरेली ह परकरीति ल धन्यवाद देय बर किसानमन के तिहार आय। बारिस, हरियाली के सुवागत करेके किसानमन के अपन तरीका हे। हरेली म किसानमन खेती-किसानी के अउजार के पूजा करथें। गाय-गरवा ल बेमारी ले बचाय खातिर औसधि खवाथें। मौससी बेमारीमन ले बचे बर घर म लीम के डारा-पाना लगाथें। फेर, अंधबिसवास के चलत लोगनमन के मन म ए डर समा गे हावय के सावन अमावस्या के रातकुन टोनही अपन मंतर सिद्ध करथें। समसानघाट म साधना करथें। मंतर सिद्ध करत समे मुंह म एकठिन जड़ी रखथे, तेकर सेती लार टपकते, जउन ह आगी कस बरथे।
पहिली तो हैजा फइलय तेकरो बर टोनही ल दोस देवंय। कोन जनी, का सेती, कइसे लोगनमन के मन म ए भरम बइठ गे हे हावय के माइलोगिनमन जादू-टोना से ककरो अहित कर सकथें। लोगनमन के इही अंधबिसवास के सेती जादू-टोना के भय दिखा के ढोंगी बाबा, बइगामन ठगी, धोखाधड़ी करथें।
समाज म कतकोन परकार के अंधबिसवास अउ बुराई हावंय। मउत अउ अनिस्ट ले जुड़े अंधबिसवास ल लोगनमन झट ले मान जथें। ऐला नइ मानेय ले घलो डरराथें। काबर कि वोमन ल अपन अउ अपन परवार के जान-माल के सुरक्छा के बहुचेत चिंता रहिथे। ऐकरे सेती आजो आधुनिक, भौतिकवादी अउ सिक्छित जुग म छत्तीसगढ़ के गांव-गंवई म टोना-टोटका अउ टोनही जइसे अंधबिसवास के मनइया हावंय।
सोचव! जादू-टोना होतिस त सरकार ह परमानु बम, बंदूक, गोला-बारूद काबर बनातिस? सेना काबर रखतीस? टोनही-टोनहा, जादूगर, बइगा-गुनियामन के सेना बनाके जम्मो दुसमन देस के अनिस्ट नइ कर लेतिस! टोना-टोटका करके आतंकवादी, माओवादी, अपराधीमन ल खत्म नइ करातिस! इहीमन ल डाक्टर-नर्स बनाके बीमरहा मनखेमन के इलाज नइ करातिस।
परकिति के सम्मान के सुग्घर हरेली तिहार म पुरखा ले चलत आवत जादू-टोना के अंधबिसवास ल 21वीं सदी म सिक्छित समाज ह घलो नइ छोड़त हावंय, त अउ का-कहिबे।

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