आठे कन्हइया

आठे कन्हइया
आठे कन्हइया

Gulal Prasad Verma | Updated: 21 Aug 2019, 05:32:09 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

परब बिसेस

छत्तीसगढ़ म सिरी किरिस्न जन्मास्टमी ल आठे कन्हइया या आठे गोकुल के नांव से जाने अउ माने जाथे। काबर के भादो महीना आठे के दिन आधा रात के बेरा म भगवान ह देवकी दाई के कोख म जनम लेइस। वासुदेव ह तुरंताही रातोंरात किसन ल सुपा म बइठाके पानी ले लहरावत जमुना ल पार करके गोकुल के नंद बाबा अउ माता यसोदा के घर पहुंचाय रिहिस हे। वोकर सेती ए परब ल आठ गोकुल के रूप म मनाय के परम्परा चलत आवत हे।
जन्मास्टमी के परब ह भगवान सिरी किरिस्न के जनम के खातिर नइ मनाय जाय, बल्कि ऐहा तो लीलाधारी के वो महान चरित के गुनगान करे के खारित मनाय जाथे। अधरमीमन के नास करइया - दुवापर जुग म भगवान ह किसन-कन्हइया के रूप म जनम धरिस। वोकर सबले पहिली उद्देस्य रिहिस हेे अधरमीमन के नास करई। भगवान ह कंस के संगे-संग पूतना, बकासुर अउ तरनावरत जइसन राक्छसमन के नास करिस।
काम, गुस्सा, लोभ, मोह, मद अउ मत्सर ये मनखे के छह किसिम के अनगुन बताय गे हे। देवराज इन्द्र ल अपन पूजा करवात-करावत गुमान होगे रिहिस हे तेला तोड़े खातिर गोवरधन पहार के पूजा कराइस। उही ढंग ले दुरयोधन के छप्पन भोग ल ठुकरा के गरीब भक्त विदुर के घर म सुखा रोटी खाके दुरयोधन के गरब गुमान ल तोरिस। भगवान के बाल सखा सुदामा ल कोन नइ जाने जेकर परेम अउ भक्ति म भगवान ह अइसे बंधागे के तीन मुट्ठी चाउर के बदला म तीन लोक ल दे बर तइयार होगिस। भक्त राज सुरदास जब्बर गरंथ ल लिख के मढ़ा दीस। किसन के दीवानी भगवान के परेम पुजारी वो मीरा ल देख जेन ह गिरधर गोपाल ल पाय के खातिर जहर महुरा ल घलो पी दीस।
भगवान सिरी हरि ह कन्हइया जनम धर के परेम अउ भक्ति के अइसने गंगा बोहाइस जेन ह वोकर दूसर कोनो अवतार म देखे बर नइ मिलिस। राधा अउ किसन के परेम ह परेम अउ भक्ति के, परेम अउ समरपन के उदाहरन बनगे। भगवान के लीला अद्भुत रिहिस, जेकर रसपान फकत राधा, यसोदा, गोप ग्वाल ह नइ करिस बल्कि पूरा बरजभूमि ह अउ पूरी दुनिया ह देखिस अउ सुनिस हे। भगवान के ये जम्मो चरित ह जाति, धरम अउ भेदभाव ल भुलाके मनखे-मनखे अउ जम्मो जीवधारीमन बर परेम अउ दुलार के संदेसा देवत हावय। जब माया-मोह के धरमसंकट म फंसे अरजुन ह गांडीव ल जमीन म रख के भगवान के आघू म लड़ई नइ करे के बात करय, वोकर उत्तर म भगवान किसन ह अरजुन के सहारा लेके ये पूरा संसार ले करमफल के जो उपदेस दीस हाबे वोहा गीता के रूप म अखिल विस्व म आजो बिखरे हावय।
द्य श्रवणकुमार साहू, राजिम

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