सरग ले आए फूल

सरग ले आए फूल
सरग ले आए फूल

Gulal Prasad Verma | Updated: 21 Aug 2019, 05:39:45 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

बिचार

त इहां के सियानमन कहंय- बेटा! हरसिंगार के फूल ह सरग ले आए हावय रे। फेर संगवारी हो हमन उंकर बात ल बने ढंग ले समझ नइ पाएन।
हरसिंगार ह एक दिव्य रूख माने जाथे। हरसिंगार जेला संस्करीत म सेफालिका, मराठी म पारिजात, गुजराती म हरसनगार, बंगाली म सिउली कहे जाथे। ऐकर बिग्यानिक नांव हवय -निक्टेंथिस आर्बोर्टिस्टिस जउन ह पस्चिम बंगाल के राजकीय फूल हरय। ऐकर पेड़ ह 10 से 15 फीट ऊंच होथे।
हिन्दू धरम मं ऐकर अड़बड़ महत्तम हावय। हमर धरम ग्रन्थ के अनुसार ऐकर उत्पत्ति समुद्र मंथन ले होय रहिस हावय। जेला देवराज इन्द्र ह अपन वाटिका म लगाय रहिस हावय। हरिवंस पुरान म एक अइसे रूख के उल्लेख मिलथे जेकर छुए ले देव नरतकी उरवसी के थकान मिटा जात रहिस हावय।
एक पइत नारद मुनि ह ए पेड़ के थोरकन फूल ल लेके भगवान किरिस्न करा आइस। भगवान ह वो फूल ल रूखमनी ल दे दिहिस। ए बात ल जान के सत्यभामा ल बड़ रिस लागिस अउ वोहा भगवान से ऐकर पेड़ के मांगकरे लागिस। तब भगवान किरिस्न ह देवराज इन्द्र ल पराजित करके ऐकर पेड़ ल सत्यभामा के वाटिका मलगाइस। जब भगवान ह ए पेड़ ल लानत रहिस हावय तब देवराज इन्द्र ह ए पेड़ ल सराप दे देथे कि ऐकर फूल ह दिन म फूलबे झन करय। ऐकर फूल ह रात म फूलथे अउ बिहनिया सुरूज के उते झर जाथे। ऐकर नांव हरसिंगार ए पाय के परिस काबर कि ऐकर फूल से भगवान बिसनु के पूजा अउ सिंगार करे जाथे।
हरिवंस पुरान के अनुसार ऐकर पेड़ ल इच्छापूरक घलो कहे गे हावय। जब पांडव पुत्र, माता कुन्ती के संग अज्ञातवास व्यतीत करत रहिन हावय तब सत्यभामा के वाटिका ले ऐकर पेड़ ल किन्तूर गांव म लगा दे रहिन। माता कुन्ती ह ऐकर फूल ले भगवान सिव के पूजा करय। आज घलो ए पेड़ ह हमर भारत देस के उत्तरपरदेस राज्य के बाराबंकी जिला के अंतरगत किन्तूर गांव म लगे हावय। भारत सरकार द्वारा संरक्छित ए पेड़ के आयु 1000 से 5000 बछर के माने जाथे। ऐकर तना के परिमाप 50 फीट अउ ऊंचाई लगभग 45 फीट हावय।
हरसिंगार के फूल ह सादा होथे। जेकर डंडी ह नारंगी रंग के होथे अउ ऐकर सुगंध अइसे होथे जउन ह सब के मन ल मोह लेथेे। ऐकर फूल, पाना, छाल अउ बीजा जम्मों अब्बड़ उपयोगी होथे। ऐकर पाना के चाय बना के पीये ले डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया हर घलो ठीक हो जाथे। हिरदय रोग बर ऐकर फूल के रस काम आथे। अस्थमा बर ऐकर छाल काम आथे। ऐकर अलावा पेट के कीरा, गंजापन, स्त्री रोग ल घलो मिटाय बर ऐकर छाल के उपयोग करे जाथे। ऐकर पेड़ हमर भारत देस के बाग-बगीचाम लगे मिलथे। बिसेस रूप से मध्य भारत अउ हिमालय के तराई म जादा पइदा होथे। सबो मनखे ल घरोघर हरसिंगार फूल के पौधा लगाके के पुन कमाय बर चाही। सियानमन के सीख ल माने म भलई हावय।

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