भगवान राजीवलोचन के धाम 'राजिम

राजिम के महत्तम

By: Gulal Verma

Updated: 18 Feb 2020, 05:10 PM IST

राजिम के तिरवेनी संगम म माघ पुन्नी ले महासिवरातरी तक पंदरा दिन ले पुन्नी मेला भराथे। राजिम ल दूसर परयाग धाम कहिथें। पहिली परयाग नगरी परयागराज (इलाहाबाद) हे, जिहां गंगा, यमुना अउ सरस्वती नदिया के संगम हे। ऐमा सरस्वती नदी लुका गे हे।
राजिम नगरी म सोंढूर, पैरी अउ महानदी के संगम हे। इहां तीनों नदियां परगट हे। सिरीमद् राजीवलोचन महात्म्यम् म भगवान स्वेत वराह कहिस कि तीनों लोक म कमल छेतरा परसिद्ध हे जेला साक्छात कासी मान के देवता, लोकपाल, पारवती अउ सांप के संग महादेवजी निवास करही। मोर पांव ले उत्पन्न होके सिरी गंगाजी उहां जाही। पहिली चितरोत्पला फेर महानदी कहाही। बरम्हा के मन ले उद्भित पैरी अउ यमुना के बरोबर सोंढूर नदी मिलही तब तिरवेनी हो जही।
राजीवलोचन भगवान
राजिम म भगवान बिसनु राजीवलोचन के नांव से जाने जाथे। सतजुग म राजा रत्नाकर होइस। वोकर तपस्या ले परसन्न होके भगवान बिसनु परगट होके दूठिन वरदान दीस। एक तो राजिम म बिराजमान होय के अउ दूसर मोर पाछु अवइया मोर पीढ़ी तोर पूजा-पाठ, सेवा करय। जेन परंपरा ल चलत आज भी भगवान राजीवलोचन मंदिर म छतरीय पुजारी पूजा करथे। दूसर कथा हे कि राजिम भक्तिन माता के भक्ति ले परसन्न होके भगवान बिसनु पथरा रूप म मिलिस। पाछुू राजा जगपाल देव ह भव्य मंदिर बनाके मूरति के इस्थापना करिस। उही दिन ले भगवान के नांव राजिमलोचन परिस। बताथे कि भगवान के स्यामल मूरति पथरा असन कठोर नइये, बल्कि आम मनखे कस कोमल हावय। जइसे दूसर मनखे ल छूबे त जउन अभास होथे। वोइसने राजीव लोचन भगवान के मूरति ल छूये ले होथे। चेहरा अलग-अलग बेरा म बदलत रहिथे। बिहनिया लइका असन, दोपहर के जनवहा अउ रतिहा बेरा डोकरा दिखथे। भोग म दार-भात के संग अटका के परसादी चढ़ाय जाथे। राजीव लोचन मंदिर के महामंडप म दूथन सिलालेख हे, जेन छत्तीसगढ़ म कलचुरी राज के जानकारी देथे।
देवी-देवता
राजिम म अड़बड़ अकन देवधामी बिराजे हे। जेमा कुलेश्वर महादेव, आदी सक्ति मां महामाया, सीतला मां, राजिम तेलीन, भूतेस्वर नाथ, पंचेस्वर नाथ, राजराजेस्वरनाथ, दानदानेस्वर नाथ, सूरयादेव, गमेस देव, दुरगा मां, रामजानकी, जगन्नाथ, हनुमान जी, वामन अवतार, बदरीनाथ, नरसिंग अवतार, बराह अवतार, भगवन के विराट रूप, गरीबनाथ, पासरवनाथ, सोमेस्वरनाथ, दत्तातरेय साक्छी गोपाल, लोमस रिसी, खंडोबा तुलजा भवानी, मालवी मां, दन्तेस्वरी मां, राधाकिसन, लछमी नारायन, रामचंदर, छोटे राजीवलोचन, गायतरी मां आदि हावय। कतकोन मंदिर आठवी -नवमी सताबदी म बने हे।

Gulal Verma Desk
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