भोला भंडारी के सवारी 'नंदी

महाशिवरातरी बिसेस

By: Gulal Verma

Updated: 18 Feb 2020, 05:17 PM IST

बइला ल निस्ठा के परतीक माने गे हे। बुद्धिमान, समझदार अउ मेहनती होथे। सांत बइला ल यदि गुस्सा आ जाही त फेर वोहा सेर ले घलो लड़ सकथे। ये सब गुन के सेती भगवान सिव ह नंदी बइला ल अपन सवारी चुनिस। नंदी के बाद ले सबे बइला ल पूज्यनीय अउ भगवान सिव ले जुड़े माने गे हे। फेर, सोचे के बात हे कि नंदी के जनम कइसे होइस अउ कइसे वो बनिस भगवान सिव के सवारी।
वायु पुरान के अनुसार रिसी कस्यप के कोनो संतान नइ रिहिस। वो अउ वोकर सुवारी सुरभि ये बात ले अब्बड़ चिंतित रिहिन। एक लइका चाहत रिहिन। भगवान सिव के घोर तपस्या के बाद रिसी कस्यप अउ सुरभि ल लइका बेटा मिलिस। बेटा जनम के बाद वोमन के जिनगी म अब्बड़ खुसहाली आइस। तेकर सेती वोमन अपन लइका के नाव नंदी राखिन जेकर मतलब उल्लास अउ खुसी होथे।
कुछ दूसर पुस्तक के अनुसार एक बार रिसी सिलाद ह इंद्र देवता ले अमर अउ सुग्घर संतान के इच्छा करिस। त भगवान इंद्र ह भगवान सिव ले आसिरवाद लेय के सलाह दिस। भोलेनाथ के किरपा ले रिसी सिलाद ल मैदान म एक लइका मिलिस। जेला वोहा गोद म ले लिस।
सिलाद के भक्ति ले खुस होके भगवान वरुन अउ मित्र वोकर से मिले पहुंचिन। वो दूनोंझन रिसी सिलाद ल लंबा उमर के वरदान दिस अउ एक बात बताइस कि वोकर बेटा के 8 बरस के उमर म मउत हो जाही। वो समे नंदी के उमर 7 बरस रिहिस। जब नंदी ल ऐकर पता चलिस त वोहा अपन ददा के दुख ल बरदास्त नइ कर पाइस। वोहा अपन भक्ति ले भगवान सिव ल प्रसन्न करे के मन म ठानिस।
भगवान सिव ह बालक के पराथना ल सुनिस अउ दरसन दिस। साथ म तोहफा म घंटी के एक माला दिस। भगवान सिव ह कम उमर म मउत के सराप ल खत्म करिन अउ साथ म नंदी ल बताइन कि वोहा आधा मानुस अउ आधा बइला वाले सरीर के जइसे जिनगी बिताही। अइसे माने जाथे कि ये घटना के बाद सिलाद अउ नंदी, भगवान सिव के निवास इस्थान म पहुंचिन। जिंहा भगवान सिव ह नंदी ल अपन वाहन सवारी के रूप म मानिन। तब ले भगवान सिव के मंदिर म नंदी के घलो पूजा करे जाथे।
कुरनूल म मउजद महानन्दीश्वर मंदिर जइसे अउ भी कुछ पूजा इस्थान हे, जो नंदी के पूजा करे बर तइयार करे गे हे। इहां सिरिफ नंदी के सबले बड़े परतिमा हावे। नंदी नियाय, भरोसा, बुद्धिमता, साहस के परतिक हावे। अउ एहि गुन वाले मनखे भगवान सिव ल प्रिय होथे।
ये भी कहे गे हे कि जब भगवान सिव ह तांडव करथे त वो बेरा म नंदी संगीत बजाथे। भगवान सिव के सेना ल चलाय के जिमेदारी नंदी ल दे गे हे। अउ वोहा ऐरावत नाव के दुस्ट हाथी ले मुक्ति दिलाय रिहिस। नंदी धरम के रच्छा करथे अउ बरदान देथे। ऐकरे खातिर कहे जाथे 'मोर भोला हे भंडारी, करथे नंदी के सवारी।Ó

Gulal Verma Desk
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