जोत-जवारा

परब बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 27 Mar 2020, 04:09 PM IST

छ त्तीसगढ़ खेती-किसानी के परदेस आय। बहुत पहिली ले गांव-देहात म कोदो, कुटकी, धान, चना, गहूं, तिली, अरसी, सरसों अउ राहर के खेती के करत आवत हे। सावन म किसान धान बोथे, चइत म जंवारा बोथे। जवारा म जवा, चना, उरद के फूलवारी बोथे। आदिसक्ति अउ अदृस्य सक्ति इही जोत-जवारा हरय। अदृस्य सक्ति जेहा दिखय नइ, वो जोति रूपी सक्ति हरय।
आदिसक्ति अन्न के देवइया महतारी ए, येहू सक्ति आय। अन्न ल खाके मनखे अउ सबो जीवधारीमन ताकतवर बनथे ते पाए के सक्ति के रूप आय। तेकर पाए के हमर पुरखामन जवारा बोवंय जोत जलावंय। जोत गियान के परतीक आय अउ जवारा सुख ,समरिद्धि खेती-किसानी के परतीक आय। ते पाए के हमर गांव-देहात म आज ले जोत जलाथे अउ जवारा बोथे। हमर पुरखामन परकिति पूजा करंय, वोला देवता मानंय। जोत-जवारा के परम्परा हमर संस्करीति आय अउ हमर आस्था घलो आय।
तइहा ले इंहा के मनखे जवारा बोके अउ जोत जलाके सक्ति के पूजा-पाठ करत आत हे।जोत-जवारा म सगा-सोदरमन ल नेवता देथे। जम्मो कुटुम्ब सकेला के एक संघरा पूजा-पाठ करते, सेवा करथे अउ भोजन परसाद पाथें।

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned