सीतला दाई के जुड़वास

समाज

By: Gulal Verma

Published: 29 Jun 2020, 06:09 PM IST

असाढ़ के महिना म सीतला दाई के बड़ भगती- भाव ले दूध अभिसेक करे जाथे, जेला सीतला जुड़वास कहे जाथे। छत्तीसगढ़ के जम्मो सहर, नगर, गांव-गांव म दाई सीतला के डेरा (मंदिर) जरूर रहिथे। काबर कि हमर गांव के हियाव करइया दाई ह रहिथे। सबो किसम के बिधन बाधा ले लोगन अउ गांव के हियाव करथे।
सीतला दाई के बारो महीना सेवा करथन। चइत नवरात परब म जग-जंवारा बोथन, कुंवार नवरात म करसा मढ़ाके जोत जलाथन, अपन घर के सुख अउ दुख के बेरा म घलो दाई ल बरोबर मनावत रहिथन। जइसे- बर-बिहाव म देवतेला परम्परा के रूप म अपन कारज ल सुफल बनाय बर बिनती बिनोथन।
कहे जाथे कि असाढ़ महीना के अंधियारी पाख म आठे तिथि के सीतला दाई ह अवतरित होइस, जेकर खातिर गांवभर के जुरमिल के असाढ़ महीना म सीतला दाई के पूजा-अराधना करथन अउ दाई के जुड़वास मनाथन।
जउन दिन जुड़वास मनाथन तउन दिन डेहरी ल गोबर पानी म लिपथे। बड़े मुंदराहा ले दाई परानीमन सीतला दाई के डेरौठी के संगे-संग अपनो अंगना-दुवारी ल गोबर पानी म लिपथे अउ सुग्घर-सुग्घर चउंक पूर के दीया जलाथें।
करसा परघाथे : बिहनिया ले एक जघा जुरिया के नान्हे-नान्हे बेटी परानीमन मुड़ म करसा ल बोह के एक संघरा गांवभर ल रेंगत उखरा पांव घूमथे। आगू-आगू सेऊकमन मांदर अउ झांझ-मंजीरा बजावत करसा ल परघाथें अउ सीतला दाई के सेवा गाथे।
करसा परघागे चरन पखारंव।
सेवा गुन ला गावंव वो।
जिनगी के ताप ल हर लेहू माया।
तोर जुड़वास मनावंव वो।
दूध ले अभिसेक : आज के दिन प्रमुख रूप ले सीतला दाई ल दूध ले नहवाथे। नीम पत्ती के हार बनाके पहिराये जाथे अउ संगे-संग हरदी के टीका घलो लगाये जाथे। बिग्यानिकमन के मानना हावय के नीम अउ हरदी म औसधीय गुन पाये जाथे, जेकर से कतकोन किसम के संक्रामक रोग-राईमन दूरिहा भागथे।
बासी के भोग लगाथे : जुड़वास ले एक दिन के आगु बने खीर के भोग याने बासी के भोग दाई ला लगाये जाथे अऊ बाद मा ऊही ला प्रसाद के रूप मा भगतमन ला बांटे जाथे।
अखंड जोत जलाथे : सीतला दाई के अंगना म जुरमिल के पूजा-हवन करथे अउ संगे-संग अखंड जोत घलो जलाथे। कोनो घी के जोत बार के, कोनो तेल के जोत बार के दाई के पूजा अराधना करथे।

Gulal Verma Desk
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