जिनगी के सार

समाज

By: Gulal Verma

Published: 24 Aug 2020, 04:55 PM IST

मानुस तन ल पाके हमन मोह फांस अउ सुवारथ म ये जिनगानी ल खत्म कर देथन। फेर, कभु नइ सोचन कि जिनगी के जो भी घटना घटथे, वोहा फेर नइ आवय। ऐहा सकरी के नार फांस बरोबर होथे। हमन सोचथन कि हमर पुरखा से लेके आज तक इही कुआं, इही तरिया, नदिया म रोज नहाथन। ऐमा पहली बेवहार के रद्दा हव। उही तरिया अउ उही पानी म नाहथन। इही म दूसर रद्दा हवय। जेन ह सत हे परमारथ के रद्दा। जेन ह ये कहिथे कि पहिली दिन के नाहय जगा अउ पानी ह दूसर दिन दूसर रहिथे।
हमर जिनगी के दुख-सुख, उतार-चढ़ाव, हंसी ठिठोली अउ मुंह फूलई सब हर आथे। जेला अपन बेवहार के रद्दा समझ के भटक जथन। ग्रीक दारसनिक पाइथोगोरस ह तीन रद्दा बताय हवय। इही तीन रद्दा म कई रद्दा देखे ले मिलथे। जेमा एक साथ मारग के रद्दा हवय। जइसे खेल म तीन परकार के मनखे ह मजा लेय बर आथे। पहिली वो मनखे जेमा धंधपानी अउ कारोबार रोजगार आथे। दूसर वो जेन अपन करतब अउ खेल म नायक बनके दिखाथे। तीसर मनखे वोहा ये जेनहा खेल ल देख के ताली बजा के मजा लेथे।
ऐमा पहली मनखे ह अपन नफा-मुनाफा के फेर म फंसे हवय। दूसर वोहा हवन जेहा ऐती रहय न वोती रहय। बीच म रहिके दूनों डहर के मजा लेथे। तीसर मनखे ह ढिढ रहिथे। इही ह उत्तम कोटि म मनखे हवय। पहिली मनखे धन के लालची, दूसर ह अपन बड़ई करइया अउ तीसर मनखे ह गियान के परेमी ह आय। हमर जिनगानी ल ठेका म देके जीयत हन।
नौकरी करथन पगार के लालच म। भगवान ल सुमिरत हन त वोकर से मांगथन। इही पूरा नइ होवय, वोला पूरा कर दे। जेहा हमर दुख के कारन बनथे। जेहा हमर बस म नइये। जब रोज छन-छन म बदलाव होवत हे तब ये काबर नइ सोचन। जउन होवत हावय वोहा भगवान के किरपा से होवत हे। जेला हमन अपन मोहमया अउ सुवारथ म तियाग कर देथन।
मन म दूठन सोच ह रहिथे। पहिली सोच ये संसार म रहिके सबो सुख ल भोग लन। दूसर सोच अपन करम गति ल करे बाद अध्यात्म, भगवान ल सोरियाथन। ये दूनों ल करे म हमन ल आजादी मिले हे। जउन भी करथन, वोकर हमन ल फल ह मिलथे। आंसू बोहा के अपन सुवारथ ल पूरा करे के काम ल बइठभारमन करथें। सामर्थवान अउ मेहनती ह चुनौती ल लेके जीतथे। जइसे भगवान किसन कन्हैया के जनम ले के पहिली वोकर परान ल लेय बर कंस ममा ह डटे रिहिस हे, फेर किसन-कन्हैया के मन म वोकर हंसी-ठिठोली ह कम नइ होइस। वोहा हर समसिया ल हांस के निकालिस।
वइसने भगवान राम ह राजा बने से पहिली जेन सांति से अपन जिनगी ल जिये हवय, अइसने बनवास काल म घलो बने रिहिस हे। मन म कूटनीति नइ अइस। ऐहा दुवापर अउ त्रेता जुग के बात आय। कलजुग म मीरा ल जहर दिस, तेन ह चरनामृत बन गे।

Gulal Verma Desk
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