छत्तीसगढ़ी भासा के भगीरथ नरेंद्रदेव

सुरता म

By: Gulal Verma

Updated: 07 Sep 2020, 02:57 PM IST

छत्तीसगढी़ धरा-धाम के मान महिमा जगाय बर अपन आखर उजोग के जोत जगैया महान साहित्य सिरजनहार के नाव आय डॉ. नरेंद्र देव वर्मा। 8 सितंबर उंकर पुन्न तिथि आय। उंकर पावन सुमिरन हमर मन-परान ल फिलोवत हे। उन देवात्मा ल अंतस ले मोर मनभरहा परनाम। उन मोर गुरु रहिन अउ मंय हंव उंकर चेला। ये जिनगी म मोर भाग आय। उंकर ले जौन गियान मंय अपन आत्मा म उतारेंव, बइठारेंव, उही मोर पूंजी आय।
डॉ. नरेंद्र देव वर्मा के मानुख देह म देवता के बास रहिस। उन छत्तीसगढ़ के गियानी-गुनी परिवार म जनम लेइन अउ जनम भुइंया के जस ल उजागर करे म जिनगी के यग्य ***** बेवहार करिन। उन महात्मा गांधी के संगवारी धनीराम वर्मा अउ मयारूक दाई भाग्यवतीदेवी के मंझला बेटा के रूप म 4 नवंबर 1939 के दिन वर्धा आसरम म अवतरिन। उंकर पिताजी सुराजी सिक्छक रहिन अउ महात्मा गांधी के बुनियादी सिक्छा अभियान बर समरपति रहिन। स्वामी आत्मानंद उंकर सबले बड़का भइया अउ डॉ. ओम परकास वर्मा सबले छोटका भाई।
डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा ह हिंदी के सुकवि अउ प्रखर वक्ता घलो रिहिन। उंकर व्याख्यान के बड़ाई पंडित जवाहरलाल नेहरू तको ह करे हवय। उन हिंदी म एक सौ ले जादा कविता लिखिन हावंय, जेन म मां भारती के रूप, रासि अउ वोकर महत्तम के सुग्घर गान अउ बखान होइस हावय। उन अज्ञेय, अंचल, बच्चन, मुक्तिबोध के कवितमन के सुग्घर सार ल समझाइन हे। वोकर सतमन ल मंथन करके उनकर जगा ठहराइन हवंय।
असल म डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा के छत्तीसगढ़ी भासा के सेवा-साधना के अब्बड़ मान होथे। जउन समे, जब छत्तीसगढ़ी ल हीनमान करे जात रहिस तौने बखत उन छत्तीसगढ़ी भाखा के मरम ल समझाइन। अपन पछरे गोठ ल मनवइन घलो। उन सोध के सीध कर देइन के छत्तीसगढ़ी बोली नोहय, बरकस भासा आय। मनखे के सब्बो तरा के भाव अउ बिचारन ल उजागर करे के वोमा सकत हावय। सही म भासा ह छत्तीसगढ़ के सांस-सांस म समाय हावय। छत्तीसगढ़ ह छत्तीसगढ़ी म सोचथे, समझथे अउ सिरजथे घलो। उन भासा बिग्यान के जरिया अपन गुनान ल सीध घलो कर देखाइन।
उन खुदेच संगीत के जानकार रहिन, ते पाय के उंकर गीतमन अड़बड़ गुरतुर लगिन। 'ढोला मारूÓ उंकर समुधर गीत रूपक आय। उपन्यास 'सुबह की तलाशÓ यानी बिहनिया के खोजार ह छत्तीसगढ़ी राज के बढ़वारी के लेखा-जोखा जान परथे। संगवारी हो! आज वो दिव्यात्मा के सुरता करे के समे हे। उंकर बताय रद्दा म चलके हमन ल छत्तीसगढ़ के पुरखौती मान-मरजाद लहुंटाना हे।
डॉ. नरेंद्रदेव वर्मा छत्तीसगढ़ी के सुकवि रहिन, मधुर गीतकार रहिन। उंकर छत्तीसगढ़ी कवितामन 'अपूर्वाÓ कविता किताब म संघराय हवंय। उन एक सौ पचास छत्तीसगढ़ी कविता के रचना करिन हावंय। उनकर कवितामन गांव-गंवई, कमिया-किसान, कोठी-कोठार, घाट-घठौंधा के जीयत-जागत रूप-रेख आय। उन खुदेच संगीत के जानकार रहिन, ते पाय के उंकर गीतमन अड़बड़ गुरतुर लगिन। 'ढोला मारूÓ उंकर समुधर गीत रूपक आय।

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned