वाह! दल बदलिस तहान दुसमन ह मितान हो गे

का- कहिबे

By: Gulal Verma

Published: 07 Sep 2020, 03:14 PM IST

मितान! ऐती दलदल, वोती दलदल। जेती देखबे, वोती दलदल। कतकोन नेता अपन सुवारथ बर दल बदलत रहिथें। कोनो नेता मंतरी नइ बनाय त दल छोड़ देथे। कोनो नेता तो टिकट नइ मिलत त दल बदल लेथे। कतकोन नेता तो 'जेती बम-वोती हमÓ, हाना ल सच साबित करत दल बदलत रहिथें। सबला कुरसी चाही। सबला मंतरी बने बर हे। सरकार बनाय बर हे, सरकार बचाय बर हे त 'जानी दुसमन ह जिगरी दोस्तÓ बन जथे। जनता ह तो 'सांप अउ नेवराÓ के मितानी देख के अपन माथा पिटत रहि जथे।
सिरतोन! आज के जमाना म जेन ल देखबे सुवारथीच दिखथे। देस, जनता अउ दल के हितवा नेता कमतिच दिखई देथे। अब दूरिहा कहां जाहू, जेन ल हमन वोट देथव, वोमन दिन-रात अपन सुवारथ म बूड़े रहिथें। अचरज के बात ये हे के जनता ह नेता बदल-बदल के देख डरिस, फेर 'उन्नीस-बीसÓ ले जादा फरक कोनो नइ निकलय। जनता ह नेता अउ नेतामन दल बदल देथे, तभे ले नेतामन के सुवारथ ह नइ जावत हे।
मितान! हिंदी फिलिम 'राम तेरी गंगा मैलीÓ के गाना हे- 'सुनो तो गंगा ये क्या सुनाए, के मेरे तटपर वो लोग आए, जिन्होंने ऐसे नियम बनाए, के प्राण जाए पर वचन न जाए। गंगा हमारी कहे बात ये रोते-रोते। राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते।Ó बस, इही हाल आज 'राजनीतिÓ के हे। नेतामन के घेरी-बेरी दल बदले अउ अपराधी किसम के मनखेमन के नेता बने के सेती 'राजनीतिÓ ह 'जनसेवाÓ के जगा नइ रिहिस। गंगा कस मैली होवत हे राजनीति ह।
सिरतोन! का राजनीति हे, अउ नेतामन के का बेवहार हे। 'टेटकामनÓ घलो मुंह लुकावत हें, नेतामन के 'रंगÓ बदलई ल देख-सुन के। काली तक बिरोधी दल म रहिके जेन नेतामन के सात पुरखा तक ल बेकार, बेईमान बतइया के दल बदलतेच वोकर हिरदयेच ह नइ, बल्किन वोकर भासा, बोली, बिचार, भगती सब एक झटका म बदल जाथे।
मितान! दल बदल के अवइया नेतामन बर सबो दलमन अपन-अपन 'धोवन मसीनÓ रखे हावंय। जेमा दलबदलू नेता ल धो-पोंठ के अपन दल के रंग म रंग देथें। काली तक जेमन पानी-पी-पी के कोसंय, वोकरमन के छी-छी, लेदर करंय, वोमन ल धोवन मसीन म साफ-सुथरा बनाके अपन पारटी के सम्मानीय सदस्य बताथें। लागथे ऐकरे सेती कहावत बनाय गे हे- 'राजनीति म न कोनो दुसमन होवय, न कोनो संगवारी।Ó काली के बइरी आज के संगी हो सकथे अउ जउन काली एक-दूसर संग दिन-रात किंजरत रहंय, वोमन आज एक-दूसर ल छूरा घोंपे बर लग जथें। जनता ह तो 'बेचारीÓ बनेच रहि जथे अउ मतदातामन ल तो कुछु समझ नइ आवय के वोमन वोला वोट देके, जीता के का 'गलतीÓ कर डरिन के, वोहा जेन दल ल हराय रिहिन वोमा चल दिस।
जब गंगा महतारी ह घलो सोचत होही के मेहा तो हजार बछर ले पापीमन के पाप ल धोवत-धोवत परदूसित होगे हंव। फेर, ये भारत देस के दलमन महापापीमन के पाप ल पलभर म धोके घलो मैली नइ होवत हे। ऐहा सुवारथ के राजनीति के चमत्कार हे, त अउ का-कहिबे।

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned