पुरखामन के दूत होथे कउंवा

हमर संस्करीति

By: Gulal Verma

Published: 07 Sep 2020, 03:27 PM IST

चालीस-पचास बछर पाछू के बात आय। ममा गांव जावंव त पितर पाख म ममा दाई ह बरा-सोहारी बनाय अउ तरोई के पाना म वोला रख के मोहाटी म मड़ा देवय। तहान ले जोर-जोर से कहाय- 'कउंवा आबे हमर मोहाटी, कउंवा आबे हमर मोहाटी।Ó ममा दाई के कहत देर नइ लागय अउ कांव-कांव करत अब्बड़ अकन कउंवा आवय अउ बरा-सोहरी ल चोच म दबा के उड़ा जावय। तब ममा दाई काहय - 'कउंवामन खाथे, तेला पुरखामन पाथे।Ó
नानपन के ये बात ह अब सपना कस लागथे। काबर कि, अब पितर पाख म कउंवा नइ दिखय। सहर के दसा अउ खराब हे। सहरीयामन ह पितर पाख म कउंवामन ल अइसे खोजथें जानो-मानो नागमनि ल खोजथे।
पितर पाख के आते साथ कउंवा के पूछ-परख ऐकर बर बाड़ जाथे कि कउंवा ल पुरखामन के दूत माने जाथे। जीयत ले जउन दाई-ददा ल मनखे फूटे आंखी देखन नइ भावय, उही सियानमन के मरनी के बाद पितर पाख म उनला सुमीरत जल-तरपन अउ बरा-सोहारी खवाय के ढोंग करथें। अपन सुवारथ म बूड़े मनखे पितर पाख म कउंवा के पाछू -पाछू दउड़थे। मनखे के अइसन दोहरा चरितर ल कउंवामन तको समझ गे हावंय। तेकरे सेती मनखे के तीर म वोमन नइ ओधंय। मनखे के अइसन दोहरा चरितर ले बने तो कउंवा के चरितर ल केहे गे हे। 'मनखे जात तन ले तो बगुला भगत कस उज्जर-उज्जर दिखथे, फेर मन वोकर करिया होथे। फेर कउंवा ह तन अउ मन दूनों ले करिया होथे।Ó साधु बन के भगत के पीठ म छुरी घोंपइया मनखे ले अच्छा कउंवा के चरितर आय। इही पाय के सियानमन कहे हावय - 'तन उज्जर मन करिया ये बगुला के टेक, ऐकर ले तो कउंवा भला जउन भीतर-बाहिर एक।Ó कउंवा अउ मनखे के रिस्ता बड़ जुन्ना आय। हमर पुरखामन ह कउंवा के कतको किस्सा गड़ेे हावंय। हमर पुरान अउ धरम गरन्थ म कउंवा के किस्सा 'कॉकभुसंडिÓ के नांव लिखाय हे। सुरदास जी तको कउंवा ल किसन भगवान के दुलरवा चिरई बताय हावय। 'कॉग के भाग बड़े सजनी, हरी हाथ से लेगयो माखन रोटी।Ó कउंवा के गिनती चिरई जगत म चतुर पंछी के रूप म होथे। वोहा रोटी-पीठा ल जरूरत ले जादा पा जाथे या फेर वोकर पेट ह भरे रहिथे तब वोहा रोटी-पीठा ल कोनो जघा लुका देथे अउ भूख के बेरा म वोला खाथे।

Gulal Verma Desk
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