लोगनमन म जागरुकता जरूरी हे

मनखेपन म रहे बर परही

By: Gulal Verma

Published: 16 Sep 2020, 04:38 PM IST

तिहारू अपन संगवारीमन ल बतावत रहिस- कोरोना महामारी ले बाचे बर सरकार ह कईठिन नियम बनाय हे। लोगनमन ल घेरी-बेरी चेतावत हे। कोरोना महामारी के रोकथाम खातिर लॉकडाउन करे गे रिहिस। ऐकर मतलब हे कि कोरोना बीमारी से बाचे बर सबो मनखे ल जागरूक होय बर परही। हमन ल उपाय करे बर परही। जइसे - एकदम जरूरी काम हे तभे घर ले बाहिर निकले बर चाही। जावत बेरा अपन मुंह-नाक ल कपड़ा म बने तोप ले बर चाही। मास्क लगाय बर चाही।
तिहारू कहिस- अस्पताल, दवई दुकान म सेनिटाइजर नाव के तेल मिलथे वोला दूनों हथेली म चुपरे बर हे। घर म जउन नहाय के साबुन रहिथे वोमा दूनों हाथ ल रगड़-रगड़ के धोय बर हे। सबले जरूरी बात ये हे के भीड़भाड़ वाले जगा म नइ जाय बर हे। एक-दूसर ले तीन फीट दूरिहा म रहे बर हे। थोरकन घला सरदी, खांसी जान परत हे त सबसे पहली अपन गांव के नजदीकी डाक्टर ल बताय बर हे अउ वोकर बताय मुताबिक रहे बर हे। तभे ये कोरोना महामारी ले हमरमन के बचाव होही।
जी वलेवा कोरोना के बखत म बड़ बदलाव होवत हे। मनखे के जिए के तरीका म अंतर दिखे लागिस। ये दुनिया ह मनखे के बपौती नोहय। धरती, अगास, पताल म जतका जीव हावय सबो के बरोबरी हक हे। मनखे अपन दिमाग के बल म किसम- किसम के मंत्र, तंत्र अउ यंत्र बना डरे हे। वोकरे बल म वोहा कभु-कभु अपन-आप ल भगवान माने के गलती कर डरथे। तइहां के कथा-कहिनी म बताए गे हे के- 'सहसबाहू दसबदन आदि नृप, बचे न काल कलीते। हंू हंू कर धन धान संवारे, अंत चले उठ रीते।Ó धन, जन अउ मूड़ म घमंड नइ करे बर चाही।
जेमन अहंकार के घोड़ा म चघके अति करिन तेकर अंत घलो होगे। अइसे नइये के ये सबला मनखे नइ जानंय। तभो जियत ले सोचथे के 'मैं न मरौ, मरिहै संसाराÓ अउ अपन सीमा छोड़ के दूसर के हक घलो म नीयत खराब करथे। कुछ गलती तो अइसे रहिथे जेकर सजा अवइया पीढ़ी ल भोगे ल परथे। सीखे के बात अतके हे के हमन ल अपन मनखेपन ल छोड़े बर नइ चाही। सरकार के चेतावनी के पालन करिन। बड़े बड़े बवंडर घलो थिरा जथे। मनखे ह कोरोना ल घलो जल्दी मात दिही।

Gulal Verma Desk
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