हमर पढ़ंता बेटा

कहिनी

By: Gulal Verma

Published: 22 Sep 2020, 04:28 PM IST

दिल्ली म रहिके पढ़ई करइया वोकर पढ़ंता बेटा ह दू बछर म घर आय रिहिस। एक हप्ता होगे दाई ह बड़ बीमार परे रहय, तभो ले मया के मारे कुहरात-कुहरात पढ़ंता बेटा बर आनी-बानी के जिनिस ल बनइस अउ वोला खवइस। छोटे बेटा ह दाई के सब्बे काम म संग दिस।
छोटे बेटा ह पढ़े म कमजोर रिहिस, फेर सबे काम करे बर बढ़ आगू। घर के बहरई, साफ-सफई, गोबर-कचरा करई, लिपई-पोतई, कपड़ा-लत्ता धोवई के काम ल करय छोटे बेटा ह। अवइया-जवइयामन बर बने चाय-पानी घलो बना देवय। बजार ले साग-भाजी अउ कुछ भी जिनिस बिसाय के लाय बर बढ़ होसियार रहय।
वोकर म एकेठन पय रिहिस कि वोहा पढ़ई म कमजोर रिहिस, तेकर सेती वोहा दाई-ददा ले अड़बड़ गारी खाय। दूनों परानी वोला ***** कहंय अउ टचरा मारंय- हमर पढ़ंता बेटा ल देख रे गधा। बड़े नउकरी पाही, पइसा कमाही। वोकर से कुछु सीख। पढ़बे नीही त तोला वोकर नउकर बनके रहे ल परही। अइसने कहि-कहि के वोला जादा पइसा घलो नइ देवंय। फेर, बड़े बेटा ह जतेक कहय वोकर ले जादा पइसा वोकर खाता म छोटे बेटा से डरवांय। छोटे बेटा चुपे-चाप रहय, का करतिस बेचारा!
दिन ह तो काम-बुता म बीत गे। आज तो दाई ल अउ जादा बुता करे बर हे। वोकर पढ़ंता बेटा ह काली दिल्ली जवइया हवय। दिनभर कुहरा-कुहरा के दाई ह आनी-बानी के जिनिस ल बनाइस। संझा होत-होत दाई के बीमारी ह अउ बडग़े। छोटो बेटा ह वोकर हाथ-गोड़ ल लगरिस। दवई-दारू ल खवाइस। रातभर दाई के सेवा करत-करत जागिस।
ऐती पढ़ंता बड़का बेटा ह जब ले आय रिहिस, तब ले एक हाथ म किताब अउ दूसर हाथ म टीवी के रिमोट अउ मोबाइल ल धरे रहय। फेर, दाई के तबियत के बारे म एको कनि चिटपोट नइ करिस, न पूछिस। दाई ह कलहरत-कलहरत रतिहा ल बितइस। ददा बिचारा ह कभु छोटे बेटा ल कभु बड़े बेटा ल देखत रहय। पुलिस के छोटे नउकरी म वोला ओतेक समे घलो नइ मिलय।
बिहनिया हब-हब उठके दाई ह छोटे बेटा संग अंगाकर रोटी बनइस। छोटे बेटा ह पताल के चटनी ल सील म ***** के अपन बड़े भाई ल दिस।
अभु बड़े बेटा ह पाना रोटी ल बने खाय घलो नइ रिहिस के वोहा चिल्लाय के सुरू कर दिस- 'चल यार मोला जल्दी छोड़ दे। गाड़ी चूक जही त हवई जिहाज म जाय ल परही। काहत-काहत अंगाकर रोटी ल आधा खाइस, आधा छोडि़स।
छोटे बेटा ह अपन बड़े भाई के बेग-वेग ल धरिस अउ बाहिर के फइरका डहर निकल गिस। दाई-ददा ल जावत हंव कहिके बड़े बेटा घलो बाहिर निकल गे। आज दाई-ददामन के आंसू ह बोहाय लगिस। दूनों परानी एक-दूसर ल नइ देखे सकिन। जर के मारे दाई के देह ह आगी कस जरे लागिस। आज वोमन दूनों परानी जान डारिन के वोकर पढ़ंता बेटा कोन ह आय।

Gulal Verma Desk
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