कासी फूलथे त बारिस जाथे

हमर संस्करीति

By: Gulal Verma

Published: 22 Sep 2020, 04:47 PM IST

हरियर भुइया म जब कासी फूलथे, तब परकरीति के खूबसूरती अउ बढ़ जथे। देखे म अइसे लागथे जइसे धरती दाई ल परकरीति ह सादा फूल ले सजा देहे। अउ खुद परकरीति ह सादा चादर ओढ़ लेहे। कासी घास के एक प्रजाति आय। जेन ह खेत-खार, मेड़-पार, नदिया-कछारमन म उगथे। ये सादा कासी फूल के माधियम ले परकरीति के वंदना करे जाथे।
कासी फूल के मतलब येहा बरसात के मौसम के सिराय के सूचना आय। यानी अब खेती के काम सिराग गे। अइसन हमर पुरखामन मानथे। अइसन कहे जाथे के कासी के फूल भादो महीना के आखिरी म फूलथे। कासी के फूल बरसा आधारित खेती के समाप्ति के सूचना जुन्ना समे ले ही गांव-देहात के अंचल म देवत आवत हे। अइसन घलो माने जाथे कि कासी के फूल फूले के मतलब येहा दाई दुरगा के आगमन यानी दुरगा पूजा आय के घलो संकेत देथे। जानकारमन के मुताबिक कासी के औसधीय महत्व घलो बहुतेच हे। येला एक किसम ले आयुर्वेदिक दवा के रूप म घलो उपयोग करे जाथे। कासी के जिक्र लोककथा अउ प्राचीन ग्रंथमन म घलो मिलथे। गोस्वामी तुलसीदासजी ह घलो राम चरित मानस म रितु बरनन के कड़ी म कासी फूल के चर्चा करे हे।
फूले कास सकल महि छाई। जनु बरसा कृत प्रकट बुढ़ाई।
येकर मतलब हे कि यदि कासी के फूल फूले ल धर लेहे त समझ लेय बर चाही कि बारिस के बुढ़ापा आ गे हे। यानी कि मानसून बिदा होवइया हे। अउ सरद रितु अवइया हे।

Gulal Verma Desk
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