सबको सन्मति दे भगवान

बिचार

By: Gulal Verma

Published: 30 Sep 2020, 04:48 PM IST

येबात सच हे कि जब कभु अहिंसा पर गोठ-बात होथे त बुद्ध, महावीर अउ गांधी ल सुरता करे जाथे। हमन देखथन कि उपदेस देवइया मन खुद वोला अपन ऊपर उतार नइ पावंय। फेर, ये बात ह महावीर, बुद्ध अउ गांधी बर लागू नइ होवय। ये महान आत्मामन अहिंसा के महत्व ल जानिन, परखिन, समझिन अउ वोकर रद्दा म चलिन। अहिंसा के परभाव अउ अनुभव के आधार म दूसर ल घलो ऐकर रद्दा म चले बर कहिन।
जब मोहनदास करमचंद गांधी अपन माता पुतलीबाई ले बिदेस जाय बर मंजूरी मागिन त वो बेरा एक जैन मुनि बेचरजी स्वामी के आघू तीन परतिग्या मांस, मदिरा अउ परस्त्री के तियाग करे के परन के बाद ही उंकर माताजी वोमन ल बिदेस जाय बर मंजूरी दिन। उंकर जिनगी अहिंसा के पालन के सुग्घर अउ बिचारे लइक सन्देस आय। अहिंसा बीर मन के धरम आय। अहिंसक सुभाव बीर के करम आय। अहिंसा बर चिंतन बीरमन के जिनगी के मरम आय।
महात्मा गांधीजी साफ़ सब्द म समझाय हे कि अहिंसा सबले बड़े कर्तव्य आय। वोमन कहिन कि अगर हमन अहिंसा के पालन नइ कर सकन त हमन ल ऐकर भावना ल जरूर समझे बर चाही। जिहां तक हो सके हिंसा ले दूर रहिके मानवता के पालन करे बर चाही। वोमन जोर देके कहिन कि अहिंसा म अतना ताकत हे कि वोहा बिरोधीमन ल घलो अपन हितवा संगी बना लेथे अउ उंकर परेम ल पा लेथे।
गांधीजी के अहिंसा अउ सत् ले गहिरा संबंध ही नइये, बल्किन वोमन अहिंसा अउ सत के आदर्स ल समझिन। अपन जिनगी म उतारिन अउ वोला जन आंदोलन के रूप म बदल के भारत माता ला पराधीनता के बेड़ी ले मुक्ति दिलाइन। महात्मा गांधी अहिंसा, सांति अउ सद्भावना के परतीक हे। उंकर आदर्स ला परन के संग अपनाय ले मज़बूत भारत के नवनिरमान के सब्बो सपना पूरा हो जाथे। गांधीजी अइसे देस के कल्पना करे रिहिन जिहां सबला समान अधिकार मिलय। सुग्घर वातावरन हो अउ आरथिक अभावझन होवय। आज जम्मो बिस्व म महात्मा गांधी अउ उंकर अहिंसा के आदर्स ला मानथे। गांधीजी के सक्ति ल समझिन अउ मानिन त हमन अपन जिनगी ल सुखी बना सकथन। देस के समस्या ल दूर करके विस्वसांति म अपन योगदान दे सकथन।

Gulal Verma Desk
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