मां गौरी करथे बघवा के सवारी

परब बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 20 Oct 2020, 04:02 PM IST

मांदुरगा के कईठन नांव हे। सेर म सवार होय के सेती मां अम्बे ल सेरावाली कहिथें। त फेर काबर मां दुरगा ल सेरावाली कहिथे। ऐकर पीछे एक अब्बड़ परचलित कथा हावय। ये कथा के अनुसार भगवान सिव ल अपन पति के रूप म पाय बर मां पारबती ह हजार बरस ले तपस्या करिस। ये तपस्या के तेज अब्बड़ रिहिस, जेकर सेती से मां पारबती के उज्जर रंग ह सांवरा हो गिस। तपस्या के सेती मां पारबती ल भगवान सिव ह पति के रूप म मिलिस। एक पइत भगवान सिव अउ माता पारबती ह साथ म कैलास परबत म बइठे रिहिन त भगवान सिव ह माता पारबती के रंग ल देखके ठिठोली रूप म वोला करिया (काली) कहिके पुकारिस। ऐला सुनके माता ल बने नइ लगिस। माता ह कैलास परबत ल छोड़ के बन चल दिस। जिहां अपन गोरा रंग ल पाय बर फेर तपस्या करे लगिस।
जब माता ह तपस्या म लीन रिहिस त एक भुक्खड़ बघवा माता ल खाय बर माता करा पहुंचीस। फेर वो बघवा ह माता ल खाय के बजाय तपस्या म लीन माता ल चुपचाप निहारत रिहिस। माता के तपस्या ल कई बरस बीत गे। माता के संग वो बघवा ह घलो उही जगा बइठे रिहिस। फेर, माता पारबती के तपस्या ल खतम करे भगवान सिव ह पहुंचीस अउ वोला गोरा होय के बरदान दिस। त माता पारबती ह गंगा इस्नान करे चल दिस। इस्नान बर गे माता के सरीर ले एक अउ करिया रंग के देबी परकट होइस। वो करिया देबी के निकले से माता पारबती ह फेर गोरिया होगे अउ ये करिया रंग के देबी के नांव कौसिकी परिस। जब माता पारबती के रंग ह गोरा होइस वोला एकठन अउ नांव मिलिस। जेला भगतमन गौरी के नांव से जानथें।जब माता पारबती ह अपन जगा म पहुंचीस त उहां बघवा ह बइठे रिहिस। ये बात ले अब्बड़ खुस होके माता गौरी ह वो बघवा ल अपन सवारी बना लिस। बघवा म सवार होगे। ऐकरे खातिर माता गौरी ल सेरावाली (बघवा सवारी) माता कहे लगिन।

Gulal Verma Desk
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