मिठई के डब्बा

कहिनी

By: Gulal Verma

Published: 17 Nov 2020, 04:12 PM IST

स हाब हमर गांव म जवांरा मड़ाये हवय। जाना जरूरी हेÓ मुखऊ कहिस। अतका सुनके ईई सहाब बोलिस- तैं तिहार के बंगला म नइ राहस। सहाब झल्लागे। नइ सहाब बस दू दिन के बात हे, तीसर दिन फेर आ जाहूं...।
ईई साहब के बंगला के हेड चपरासी मुखऊ दिन-रात बंगला म रहिथे। मेडम अउ दूनों लड़का मुखऊला तियारे मुखऊ दिन-रात बंगला में रहिथे। मेडम अउ के अंडर म दू आदमी अउ दू रेजा नियमित आवय। काकर के से का काम लेय बर हे, मुखऊ के जिम्मा। ईई सहाब के फोन सुनई, का बोलई हे, कहां जाय बर हे मुखऊ जानथे।
नवरात चलत हे। सहाब बंगाली हवय। देवारी ले जादा काली पूजा मनाथे। इही पाय के सब ठेकेदारमन मिठई के डब्बा कपड़ा के बंडल नवां -नवां गिफ्ट लावय। आज सनिच्चर हवय। बैठक म बइठे सहाब सबके इंतजार करत रिहिस। इही बीच मुखऊ दू दिन के छुट्टी के बात रखिस। आज पचासों डब्बा आ गे रिहिस। माल- पानी, लिफाफा तको बड़ अकन सकलागे। खुस होके सहाब बोलिस- ठीक हे मुखऊ चल देबे फेर मेडम ल चेता देबे। नइ सहाब आप से पहिली मेडम से छुट्टी ले ले हंव। थोरकुन देर बाद विधायक के भांचा ठेकेदार आइस। ये चटरहा ल देखके सहाब के मूड खराब होंगे। दूरिहा से देख के मुखऊ ल कहिथे- ये बदमाश के मिठई डब्बा ल तेहा ह लेग जबे।
ठेकेदार आइस अउ पांव करके डब्बा ल दिस। अब आप ल कोनो सिकायत नइ रिहि, कही देव पक्का बात....। वोकर डब्बा ल मुखऊ झोंक लिस। सहाब बोलिस- वो डब्बा तंैं ले जा, अपन खोली म रख के आ। मुखऊ अपन घर ले गे। जेन दिन गांव जाय बर रिहिस सहाब के पांव परिस। सहाब पांच सौ रुपिया दिस। मुखऊ गांव जाए के पहिली अपन बाई ल कहिस- वो डब्बा ल देख कहूं मिठई खराब होगे होही, नवां खरीद लेबो। मुखऊ के बाई तिजिया सनपना ल खोल के डब्बा देखिस....बक खागे.... डब्बा म नोट के गड्डी भरे रहय।
सोनू के बाबू देख तो। मिठाई के बदला नोट के गड्डी। सहाब तको माई पिल्ला कलकत्ता चले गे हे। तिजिया कहिस- सहाब मिठाई समझ के देहे। हमर भाग म पइसा लिखे ह। सब माता के किरपा हे। मुखऊ सुरता करके बताइस ये वो ठेकेदार के डब्बा हरे, जेला सहाब छूवे तको नइ, मोला दे रिहिस...। तभे कहिथंव, ये हमर भाग के हे।
मुखऊ कहिस- मोला डर लगथे। तिजिया अतेक रुपिया मोला हजम नइ होही। तिजिया पक्का जवाब दिस। देख तै मांगे हस, ना तैं जानत रहेस। मोला दे हस। मैं ये परसाद ल पाये हंव। चल ये सबला गिन के बता। घबरा मत मोर रुपिया हवय। मुखऊ गिन के कहिस- कुल 5 लाख हवय। तिजिया के बल बाढ़ गे काबर कि वोकर दिमाग म बड़ा कका के खेत जेन इंकर खेत से जुड़े रिहिस ल बिसाये के जनत दिखे लगिस।
गांव पहुंचिन। घर म तिहार के धूम मचे रिहिस। आठे के हुमन जरा होगे। दूसर दिन जवांरा बिदा होगे। रात के बड़ा, वोकर बेटा, कका के दूनों बेटा मुखऊ के बाबू सबो के परिवार ल मुखऊ सहर ले लाथे। अंगरेजी सराब पिलाइस। वाह, वाह मुखऊ आत्मा ल जुड़ा देस बेटा। मांग का मांगना हे....बड़ा अउ कका दिल से कहिस। मुखऊ पांव पर के कहिथे। मैं किसानी करे बर चाहत हंव। आप दूनों अपन-अपन खेत ल बेच दो, मैं बिसाहूं, कतेक म देहू। दूनों सियान खुस होके कहिस- तै हमर बेटा हरस। चार एकड़ के दू लाख देदे। पहिली एक लाख बाद म एक लाख। कका घलो कहि दिस, घर के जमीन घर म रिही। वतके मोला दे देबे।
मुखऊ कहिस- ठीक हे बड़ा मैं एक साथ दू-दू लाख कल देहूं। रजिस्ट्री के खरचा उही म निपटा दुहूं। पक्का बात बेटा, सब खरचा उही म कर देबे। दू दिन म घर के खेत के रजिस्ट्री तिजिया के नांव म होगे। सियानमन चल दिन।
मुखऊ तिजिया ल गांव म छोड़ के वापस सहर आ गे। ईई सहाब के बंगला म मुखऊ पहुंचिस। अतके म सहाब आके बताइस के मोर तबादला हो गे हे बलरामपुर। वोहा खुस होवत रिहिस काबर कि वोकर ससुरार उही कोती हे। सहाब कहिस- मुखऊ तहूं जाबे, मेहा तोर घलो तबादला उहें करवा देहूं।
नइ सहाब, हमर घर, खेत, परिवार इहें हवय। नइ जा सकंव। ठीक हे, तोर तबादला गांव म करवा देथंव। उहें रहिबे। मुखऊ के नौकरी गांव के आफिस म होगे। खेत-खार, घर-परिवार सब मिलगे। साहेब विदा करत समे मिठई के डब्ब दिस। मुखऊ खोल के देखिस, वोमा मोतीचूर के लाड़ू रिहिस, वोहा अब्बड़ खुस होगे।

Gulal Verma Desk
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