मितान

नानकीन किस्सा

By: Gulal Verma

Published: 23 Nov 2020, 04:22 PM IST

एक गांव म दूझन पढ़े लिखे मितान रहिस। एक के नांव रामू, दूसरा राम। दूनों मितान एक संघरा अपन गांव के मैदान के तीर बर पेड़ मेर बइठे रहिस, तभे उही बेरा म गांव के एकझन सियान ह अइस अउ दूनोंझन के बीच म आके बइठ के पूछिस- सब बने-बने बाबू रे।
रामू अउ राम ह एक आवाज म संघरा बोलिस हव बाबा हमन बने हन। तब डोगरा बाबा ह दूनों ल बोलिस सुनव बाबू रे! एक बात पूछंव रामू अउ राम कहिस- पूछ न बाबा का बात ए। बाबा कहिथे -बड़का बात नोहे बाबू रे। पहिली बात पूछिस बाबा ह तुमन कभु झगडा़ होय हव? दूसरा तुमन एक दूसरा के निंदा करेव हव? बाबा के सुवाल म दूनों मितान सोच म पर गे। रामू कहिथे- बाबा हमन अब्बड़ झगडा़ होथन। थोकिन थोकिन गोठ बात म। मंय दूसरा संगवारीमन के संघ रहिथंव त रामू के बारे म निंदा कर परथंव बाबा।
बबा कहिथे- मीत-मितान के काम ह छोट-मोट काम नोहय। मीत-मितान ह एक नवा परिवार बनाथे अउ संस्कार के घलो पाठ पढ़ाथे। दूनों मितान ह बाबा के अत्तके गोठ ल सुनके बाबा ले दूनोझन हाथ जोड़के माफी मांगिस अउ कहिस- बाबा अबले हमन दूनोंझन मितान बने-बने रहिबो।

Gulal Verma Desk
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