मोहरी के कलाकार सदाबृज

लोककला

By: Gulal Verma

Published: 30 Dec 2020, 05:06 PM IST

लोककला
मोहरी के कलाकार सदाबृज
मं दराजी ह अपन जिनगी के आखिरी बसंत म जेन गरीबी के भोंभरा म जर के जिनगी ल बिताइस, वइसने आज घलो दाऊजी जइसन नाचा के कतको नामचीन कलाकार अउ उंकर परवार ह गरीबी के भोंभरा म जरत हे। फेर सरकार इंकर आरो नइ लेत हे।
संगीत के जानकारमन कहिथे कि जेन प्रतिभा अउ संगीत के साधना सदाबृज म रिहिस वो हिसाब ले वोहा उच्च कोटि के कलाकार रिहिस। अपन मोहरी के तान ले मधुर संगीत ल दे के सदाबृजजी परलोक चल दिस, फेर आज घलो सब के हिरदे म अपन संगीत ले जियत हे।
राजनांदगांव जिला के छुरिया तहसील ले रक्सेल कोती 20 किलोमीटर दूरिहा म बसे गांव केसोखैरी म गरीब किसनहा परवार म जनम पाय सदाबृजजी ह नानपन ले लोक संगीत के कला साधना म अपनआप ल समरपित कर देय रिहिस। अपन अल्पआयु म घलो हमर अंचल के नाचा-गम्मत के संगीत ल एक नवा सरग कस ऊंचाई दे के ये कहावत ल सच कर दिस की ‘पखना म दबे हीरा’ गांव के संसाधन अउ सुविधाविहीन घर म भी रहिके हार नइ मानिस। संगीत के सरलगहा साधना करत अपन एक-एक सांस ल जियत भर ले नाचा के मंच म संगीत ल सजाय बर निछावर कर दिस।
सरकार के पाछु एक सवाल घलो छोड़ के चल दिस की कलाकारमन के पारिवारिक जिनगी ल आज झांक के देखे के जरवत हे। जेन कलाकार अपन जियतभर ले राज के कला, संस्करीति ल सजाय अउ संवारे बर अपन तन ल घलो खुवार कर देथे। कतको कलाकार बीमरहा तन ल लेके अउ काही अलहन म अल्पमृत्यु के काल म झपा के अपन पूरा परवार ल अधर म छोड़ के चल देथे। अइसन कलाकारमन के परवार के सरकार ल सुध लेय ल परही।
सदाबृज के पारंपरिक गड़वा बाजा म मोहरी ले संगत करत, सुने म अइसे थोरको नइ लगे की राधेलाल गंधर्व ले सदाबृज ह अपन नाचा ठेठ म तनिक भी पाछू रिहिस। मोला छत्तीसगढ़ के पहिली गड़वा बाजा प्रतियोगिता म भाग लेय के संगे-संग राधेलाल गंधर्व ल भी सुने के अवसर मिले रिहिस।
वो समे म सदाबृजजी ह सबले पहिली बांसुरी बजाय बर सिखिस अउ बिहाब बाजा म आप दफड़ा घलो बजाय। फिर छत्तीसगढ़ के लोक नाट्य नाचा म मोहरी (सहनाई) बजाय बर छत्तीसगढ़ के करार म बसे अउ अपन समे म ख्यातिप्राप्त नाचा पारटी धामनसरा (महारास्ट्र) के सुरुज चंदा नाचा पारटी म संगत करिस।

Gulal Verma Desk
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