नवा बछर के चिनहा

कहिनी

By: Gulal Verma

Updated: 11 Jan 2021, 03:56 PM IST

संतोस के जइसने नाव तइसने मनखे। साग-भाजी बेंचत अपन जिनगी के साठ बछर ल पुरो डरिस। बने मया कराइया गोसाइन पाय रहिसे। खेती -बारी अउ घर गृहस्थी मा खांद जोरे संग मा रेंगय। एक एकड़ के खेत अउ बारी मा साग भाजी बोंवय अउ बेरा बखत म वोला बजार-हाट मा बेंचय। बासी पेज खा के बेरढरती चरबज्जी हटरी मा साग भाजी धर के संतोस हा बेचेबर चल देतीस। हाट ले आवत ले वोकर गोसाइन ह भात-साग रांध लेतीस। संतोस के घर आय पाछू हिसाब किताब करके खाती पीतीन।
संतोस के बिहाव पाछू एक नोनी मिसरी अउ एक बाबू सुजल होइस। नोनी ला अपन सक्ति के मुताबिक कालेज तक पढ़ाइस। सगियान होइस ता बने असन सगा देख के वोकर बिहाव कन्यादान करके गंगा नहा डरिन। बेटा ला घलो पढ़ाइन, फेर पइसा के कमती के सेती वोला कोनों सरकारी नउकरी मा नइ लगा सकिन। बखरी बारी ले दूरिहाय के सेती वोहा साग भाजी के धंधा मा घलो नइ मिझर सकिस। ननपन के वोहा मेकेनिक असन रहय त वोला सहर मा मोटर साइकिल बनाय के दुकान धरा दिस। वोकरो बर-बिहाव करके बहू के हाथ के अमरित पानी पी डरिन। बेटा-बहूमन अलग होके सहर मा रहेबर चलदीन।
संतोस ह नाती-नतरा वाले होगे फेर एकेचठन बात कोकर मन ले नइ उतरीस की वोकर ददा के देय चिन्हा एक एकड़ खेत ला दू एकड़ नइ कर सकिस। दूसर वोला ये फिकर धरे रहय कि मंय अपन बेटा ल वो एक एकड़ ल घलो नइ दे सकंव। काबर कि सरकार हा नवा कानून बनाय हे कि अब ददा के खेती मा बेटी ला घलो आधा हिस्सा बांटा मिलही। इही घुना ह वोला खावत रहय।
ऐती सुजल ह खेत ल अपन नाव मा करेबर दू चार पइत कहि घलो डरे रहय। फेर संतोस ह नोनी के हक ल कइसे मारों कहिके कलेचुप कठलाय बइठ जावय। थाना कछेरी ला कभू बाप पुरखा नइ जानय। बेटी ह कहूँ थाना कछेरी कर दिही ता कतको पइसा फूंका जाही। फेर रातदिन गुनय कि जीयत जीयत ऐकर उदीम तो करेबर परही।मिसरी ल एक दू पइत ललछरहा ए बात ला बताय हे फेर हकन के नइ कहि सकिस कि तोला बांटा हिस्सा नइ देवंव। एसो तीजा बर आय रहिस त बात ल संतोस हा फोरियावत रहिस। फेर सुजल के गुरेरत आंखी ला देख के उही मेर चुप होगे। मिसरी हाा अपन ददा के दुख ल आकब कर डरे हे, फेर अपन गोसाइया के डर म वहू हकन के नइ कहे सकय।
दिसंबर के आखरी हफ्ता म संतोस हा बीमार परगे। चार पांच दिन ले अन के एक दाना मुंह मा नइ डार सकिस। सुजल अउ मिसरी कर संदेस पठोइस कि बीमार हंव देखे बर आही। ददा के बीमार के संदेस सुनते भार मिसरी बेटी के मया बाढग़े। एक दिन पाछू मिसरी मइके अमरगे। डाक्टर देखिस त संतोस ल कोनो बीमारी नइये, सिरिफ चिन्ता हवय ओ खेत के हिस्सा बांटा के। वोकर बने होय के एक्के इलाज हे ऐकर फैसला हो जावय। ओहा मिसरी के हाथ मा हवय। सुजल ह तीन दिन पाछू अपन परिवार धरके आइस। सूजी पानी गोली दवई बर पूछिस अउ सहर के डाक्टर तीर जा के इलाज कराय बर कहिस। फेर कोनों बीमारी रहय तब तो इलाज होही?
बछर के आखिरी दिन रहय। बेटी मइके आय हवय कहिके संतोस हा अपन गोसाइन ला बला के कुछु तेलई बनायबर कहिस अउ संग मा तसमई बनाय बर कहिस। संझा बहू बेटी महतारी मिलके सुग्घर रोटी पीठा बरा भजिया बनाइन। खाय के बेरा संतोस ह अपन बेटी ल कहिस- बेटी मोर मन मा एकठन बात हवय। मोर ददा हा मोला एक एकड़ खेत देय रहिस तेला मंय दू एकड़ नइ बना सकेंव। सक्तिभर ले तुमन ल पढ़ायेंव- लिखायेंव, बर-बिहाव करेंव, फेर ओ भुइंया ला नई बिगड़ेंव अउ अब मरती पाहरो मा घलो ओला कुटका होवत नइ देख सकंव। अब ऐहा तोर हाथ मा हवय कि वोकर कुटका होही के, सइघो रइही। तैं बांटा-हिस्सा लेबे ता कुटका होही अउ नइ लेबे ता मोर पुरखा के चिनहा ह बने रइही।
मिसरी हा अपन ददा के गोठ ल सुनिस अउ खात- पीयत अपन बात रखत कहिस.- ददा ! मंय तोर बेटी आंव। तोर देय संस्कार अभी मरे नइ हे। मइके मा मोर आय के रद्दा बने रहय। तीजा-पोरा मानत रहव । मोला बांटा-हिस्सा लेय के कोनो लालच नइ ये। मंय काली तुंहर संग कछेरी जाहंूं उ सुजल के नाव मा खेत ल चढ़ा देबो। दसखत कर देहूं। भुइंया के कुटका नइ होवय। अतका सुनत संतोस ह एक कटोरी तसमई अउ मांगिस। आज वोला अपन बेटी मिसरी डहर ले नवा बछर के चिनहा मिलगे। सुजल ह घलो अपन दीदी के गोड़ धरलीस अउ अपन जीयत तक तीजा पोरा माने के कसम खाइस। वहू ल नवा बछर के चिनहा मिलगे।

Gulal Verma Desk
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