बधाई देवई-लेवई म घलो खुसर गे हे ‘सुवारथ’!

का- कहिबे

By: Gulal Verma

Updated: 11 Jan 2021, 04:22 PM IST

मितान! बधाई देवई अउ बधाई लेवई दूनों ह तो चना-मुररा बरोबर होगे हे। ये पइत नवा बछर म हमर तीर मनमाने व्हाट्सअप म बधाई देय के संदेस आइस। अइसन-अइसन लोगनमन बधाई देइन, जेमन ल हम जानत तको नइ। पहिली तो लागिस कि हो सकत हे वोमन गलती म बधई दे दिस होही। फेर, एक-दूझन के समझ म आथे, अतेकझन जेमन ल कभु न देखेन, न कभु वोकरमन से गोठियायेन, न वोकरमन के हमर तीर फोन/ मोबाइल नंबर हे, त अइसनमन ल जवाबी संदेस हम नइ भेजन। मजा के बात ये हे के जवाब नइ देय के बाद घलो समे-समे म बधाई देवत रहिथें। जइसे कतकोन कंपनीमन के आनी-बानी के ‘मैसेस’ बिन मांगें फोकटे-फोकट आवत रहिथे तइसे जानव।
सिरतोन! नवा जमाना म बिन जान-पहिचान के बधाई देवई ह घलो एक ‘फैसन’ बन गे हे। वइसे अइसन ‘फैसनेबुल’ मनखेमन बात-बात म बधाई देवत रहिथें। कोनो ल कहु ले नानमुन इनाम मिलगे त, बधाई देवइयामन के झन पूछव। बाढ़ कस आ जथे व्हाट्सअप म बधाई संदेस के। कोनो मोहल्ला-पारा के छुटभइया नेता ल वोकर पारटी के कोनो समिति के सदस्य बना दिस त वोला बधाई देय बर कतकोन मनखे उमड़ परथें। वोहा तो वोमे के कईझन लोगन ल पहिली पइत देखत रहिथे। बधाई लेय म का जाथे, जेन देथे वोकर बधाई ल झोंक लेथे। काबर कोनो ल नराज करही। जतके जादा बधाई मिलही, वोतके रूतबा बाढ़ही। बनेच बात हे!
मितान! काबर खामखां ककरो नांव-गांव पूछय, जब बिन मांगे ‘बधाई’ मिलत हे। फेर, अनजान मनखेमन के बधाई देवई ह जादा सुहावय घलो नइ। काबर के जान-पहिचान मनखेमन कस अपनापन नइ जनाय। बिन सक्कर के चाय पीये बरोबर ताप पानी कस लागथे। पीयत तो हस, फेर मजा नइ आवत हे। वइसने बिन मांगे बधाई ह घलो लगाथे। मनमाने बधाई संदेस ल देख के मन खुस तो होथे, फेर दिल ल सुकून नइ मिलय। मन भरबेच नइ करय।
सिरतोन! नेतामन के एक-दूसर ल बधाई देवई ल देख-सुनके कभु-कभु मनमाड़े हांसी घलो लागथे। बिहनिया दूसर पारटी के नेता ल जनम दिन के बधाई देवइया नेता ह सांझ होवत ले अपन पारटी के सभा म उही नेता के धज्जी उड़ावत नजर आथे। अब जनता ल देखाय बर दूसर पारटी के नेता ल बधाई देइच दिच त ऐमे कोनो हरज नइये। काबर के सच ह तो सचेच रहिथे। जनता ह तो जानबेच करथे के फलाना नेता के फलाना नेता से छत्तीस के आंकड़ा हे।
जब हमर देस के जनता ह नेतामन के नवा-नवा ‘खेल-तमासा’ ल रोज्जेच देखत-सुनत हें। जनता ल अनाड़ी समझ के होसियारी दिखई, ***** बनई आज पद, पइसा, पॉवर पाय के ‘धंधा’ बन गे हे, त अउ का-कहिबे।

Gulal Verma Desk
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