भासा ह होथे समाज के असल चिन्हारी

बिचार

By: Gulal Verma

Published: 21 Feb 2021, 04:32 PM IST

जापान, स्वीडन, चीन अउ फरांस जइसे कतकोन देसमन म न सिरिफ इस्कूल, बलकु कालेज के पढ़ई घलो महतारी भासा म मिलथे। ऐकरे सेती महतारी भासा के महिमा के सुरता देवाय खातिर संयुक्त रास्ट संघ (यूनेस्को बिभाग) ह हर बछर 21 फरवरी के बिस्व महतारी भासा दिवस (अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस) मानय के निरदेस दे हे।। ऐकर उद्देस ल बतावत यूनेस्को कहिथे के कोनो भी संस्करीति के महतारी भासा (परना वायु) के मरई माने वो भासा संस्करीति के मरई होथे। काहे के भासेच्च ह तो संस्करीति के बाहक होथे। वोकरेे जरिया ले तो संस्करीति ह पीढ़ी दर पीढ़ी आगू सरकत जाथे। महतारीभासा के नंदई याने संस्करीति के नंदई अउ संस्करीति के नंदई माने समाज बिसेस के नंदई होथे। बगैर संस्करीति के कोनो समाज के ‘का चिन्हारी।’ इही सेती ले तो जम्मो दुनियाभर ह मानथे के भासेच्च ह होथे समाज के असल चिन्हारी। तभे तो संसारभर के सबो समाज ह अपन महतारी भासा ल बचाय अउ बढ़ाय के कतकोन उदिम करत रइथें।
महतारी भासेच्च के जरिया ले तो पुरखामन के संचित गिया, बिग्यान रीत-रिवाज, परथा-परंपरा, इतिहास अउ दूसर जिनिस के जानकारी एक पीढ़ी ले दूसर पीढ़ी तक पहुंचत रहिथे। बिना भासा के तो मनखे ह कोंदेच्च रइ जाहय। अपन बिचार, भाव ल वोहा दूसर कोनो ल कइसे बताय-समझाय सकही? खाली इसारेच्च-इसारेच्च म अपन हावभाव कब तक अउ कतेकझन सों परगट करे सकही? कईठन समाजमन महतारी भासा के ये महिमा ल समझेच्च नइ सकिन।
छत्तीसगढ़ी के महत्तम ह समझव
दुनियाभर के बिद्वान, विचारकमन फइसना लिन के अब कोनो भासा मरे बर नइ चाही। 1999 म होय बइठक म बंगलादेस के परतिनिधि ह 21 फरवरी 1952 के घटना, बलिदान, महतारी भासा के भक्ति अउ वोकर सक्ति के बारे म बताइस। त यूनेस्को ह 21 फरवरी ल महतारी भासा दिवस (अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस) मनाय के घोसना करिस। अध्ययन, आत्मसम्मान अउ सभिमान के इस्तर म सुधार करे बर महतारी भासा म सिक्छा देवई ह बहुचेत जादा जरूरी हे, जउन ह बिकास के सबले बडक़ा कारनमन म सामिल हे। का छत्तीसगढिय़ामन अपन महतारी भासा ‘छत्तीसगढ़ी’ के ए महत्तम ल अपन अन्तस म धारन करहीं?
21फरवरी के महतारी.भासा दिवस काबर मनाय जाथे, ऐकरो एकठी बडक़ा अइतिहासिक कारन हे। कोनो भी भासा ह तब तक जीयत-जागत रहिथे जब तक वो भासा के बेवहार करइया माने वोकर बोलइयामन बांचे रहिथें। एहू बात ह भारी सच आय के बिना लिखई-पढ़ई के कोनो भी भासा के बोलाई ह अनन्तकाल तक बांचे नइ रइ सकय। कभु न कभु वोहा नन्दाबेच्च करथे। चाहे वोहा कतको बडक़ा महान भासा काबर नइ हो जाय। पाली, पराकिरीत जइसे कईठन जुन्ना-जुन्ना भासामन नन्दाइच्च गे हें। जिनला हमर देस के आम मनखेमन बउरत रहिन हें। संस्करीत जइसे महान भासा के बिना पढ़ई-लिखई के सेती का दुरदसा हो गे हे तेला सबझन सबो जानते हें।
बस्तर कोती के 36 ठन भासा म के गदबी, परजी, मुंडारी जइसे बीसठन भासामन घलो नंदा गे हे। फेर, पढ़ई-लिखई होय के सेती दुनिया के तुलना म मुठाभर अंगरेजमन के महतारीभासा ‘अंगरेजी’ जइसे अबेवस्थित, अबइग्यानिक, अपूरन, अधपक्का, कच्चा भासा ह दुनियाभर म बगर के कइसे राजरानी बने इतरावत हे तेन ल सबोझन जानत हें। अइसने नंदाय जाय के डर जब पूरबिया पाकिस्तान के बंग भासीमन ल सच लागिस तब उहां के बंगाली समाज ह उंकक ऊपर उरदू लदकइया पाकिस्तानी.सरकार के खिलाफ जिहाद सुरू दिस। अब्बड़ खून-खच्चर होइस। ए भासाई जुद्ध के पइहिलिच्च मोरचा मं कईझन बंगाली भाई- बहिनीमन बलिदान हो गिन। वो बलिदान के सेती एकठन नवा देस बन गे। दुनिया के इतिहास म वो बलिदान होय रहिस 21 फवरी 1952 के दिन ढाका बिस्वबिद्यालय के अंगना म। तेकरे बर वो भासा सहीदमन के सुरता म दुनियाभर ल ‘भासा-भगती’के परेरना देय बर 21 फरवली ल ‘महतारी-भासा दिवस’ घोसित करे गे हे !
21 फरवरी 2017 के दिन इही महतारी भासा दिवस के परसंग म अपन संदेसा म यूनेस्को के महानिदेसक ह पढ़ई-लिखई के माध्यम के रूप म महतारी.भासा के महत्तम के बखान करत कहे रहिस के - अध्ययन, आत्मसम्मान अउ सभिमान के इस्तर म सुधार करे बर महतारी भासा म सिक्छा देवई ह बहुचेत जादा जरूरी हे जउन ह बिकास के सबले बडक़ा कारनमन म सामिल हे। का छत्तीसगढिय़ामन अपन महतारी भासा ‘छत्तीसगढ़ी’ के ए महत्तम ल अपन अन्तस म धारन करहीं?

Gulal Verma Desk
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