राजिम माघी पुन्नी मेला के महत्तम

लोक संस्करीति

By: Gulal Verma

Updated: 01 Mar 2021, 04:41 PM IST

राजिम नगरी म सोंढूर, पैरी अउ महानदी के संगम हे। इहां तीनों नदिया परगट हे। सिरीमद् राजीवलोचन महात्म्यम् मं भगवान स्वेत वराह कहिस कि तीनों लोक म कमल छेत्र परसिद्ध हे जेला साक्छात कासी मान के देवता, लोकपाल, पारवती अउ सांप के संग महादेवजी निवास करही। मोर पांव ले उत्पन्न होके सिरी गंगाजी उहां जाही। पहिली चित्रोत्पला, फेर महानदी कहाही। बरम्हा के मन ले उद्भित पैरी अउ यमुना के बरोबर सोंढूर नदी मिलही तब तिरवेनी हो जही।
सो ढूर, पैरी, महानदी के तट म बसे राजिम नगरी म सदियों ले पुन्नी नहाए के परंपरा चलत हे। जुन्ना बेरा ले इहां भगवान राजीवलोचन के जयंती के दिन राज के सबले बडक़ा मेला लगथे। तिरवेनी संगम म माघ पुन्नी ले महासिवरातरी तक पंदरा दिन ले मेला भराथे। राजिम म भगवान बिसनु राजीवलोचन के नांव से जाने जाथे। सतजुग म राजा रत्नाकर होइस। वोकर तपस्या ले परसन्न होके भगवान बिसनु परगट होके दूठिन वरदान दिस। एक तो राजिम म बिराजमान होय के अउ दूसर मोर पाछु अवइया मोर पीढ़ी तोर पूजा-पाठ, सेवा करय। जेन परंपरा ल चलात आजो भगवान राजीवलोचन मंदिर म छत्रीय पुजारी पूजा करथे।
दूसर कथा हे कि राजिम भक्तिन माता के भक्ति ले परसन्न होके भगवान बिसनु पथरा रूप म मिलिस। पाछुू राजा जगपाल देव ह भव्य मंदिर बनाके मूरति के इस्थापना करिस। उही दिन ले भगवान के नांव राजिमलोचन परिस। बताथें कि भगवान के स्यामल मूरति पथरा असन कठोर नइये, बल्कि आम मनखे कस कोमल हावय। जइसे दूसर मनखे ल छूबे त जउन अभास होथे। वोइसने राजीव लोचन भगवान के मूरति ल छूये ले होथे। चेहरा अलग-अलग बेरा म बदलत रहिथे। बिहनिया लइका असन, दोपहर के जवनहा अउ रतिहा बेरा डोकरा दिखथे।
देवी-देवता
राजिम म अड़बड़ अकन देवधामी बिराजे हे। जेमा कुलेस्वर महादेव, आदी सक्ति मां महामाया, सीतला मां, राजिम तेलीन, भूतेस्वर नाथ, पंचेस्वर नाथ, राजराजेस्वरनाथ, दानदानेस्वर नाथ, सूरयादेव, गमेस देव, दुरगा मां, रामजानकी, जगन्नाथ, हनुमानजी, वामन अवतार, बदरीनाथ, नरसिंग अवतार, बराह अवतार, भगवन के विराट रूप, गरीबनाथ, पासरवनाथ, सोमेस्वरनाथ, दत्तातरेय साक्छी गोपाल, लोमस रिसी, खंडोबा तुलजा भवानी, मालवी मां, दन्तेस्वरी मां, राधाकिसन, लछमी नारायन, रामचंदर, छोटे राजीवलोचन, गायतरी मां आदि हावय।
कुलेस्वरनाथ महादेव
संगम के बीच म पंचमुखी कुलेस्वरनाथ महादेव के मंदिर सतरह फूट उप्पर जगती तल म बनाय गे हे। किवदन्ती हे कि माता सीता बनवास बेरा म लोमस रिसी के दरसन करे बर आए रहिस हे। रेती के सिवलिंग बना के पूजा करिस। उही दिन ले वोहा कुलेस्वरनाथ महादेव के नांव ले परगट होइस। ऐकर दरसन करे ले मन के मुराद ह पूरा हो जथे। कुलेस्वर महादेव मंदिर म एकठन सिलालेख हे, वोहा मिटा गे हे।

Gulal Verma Desk
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