जंगल म आगी

नानकीन किस्सा

By: Gulal Verma

Published: 02 Mar 2021, 04:57 PM IST

जंगल म सन्नाटा छाए रहाय। चिरई चिरगुन के गोठ नइ सुनात रहाय। गरमी के दिन भोंभरा तपत रहाय। जम्मो जीव डर के मारे गांव के तीर-ताखर म डेरा धरे रहाय। सुखाय डारा पतेरामन ल अपन काल दिखय। नान-नान फूल-फुलवारीमन मटमटाय त जम्मोझन चुप करा दंय। जंगल के सन्नाटा ल नान -नान जीवमन कइसे जानही, जंगल के राजा सेर घलो दूसर राज म पहुना बन के चल दय। जंगल के जीव जोनी बर बिपत के समे रहाय।
भोलु चितवा अपन दाई ल पूछिस- दाई-दाई हो बछर गरमी के दिन म जंगल के सब संगवारीमन हमर ले काबर दूरिहा हो जाथें। वो सब जानवर जंगल म काबर नइ रहाय? लइका के गोठ ल सुन के आंसू पोछत कहिस- सब रतिन बेटा, फेर मनखेमन अपन फाइदा बर जंगल, झाड़ी के उजाड़ करत हें। मनखे कब जंगल म आगी लगा दंय कोई नइ जानय। ऐकरे सेती अपन घर-दुवार ल छोड़ भटकत रहिथन अउ मनखेमन के घर -दुवार, गली-खोर म खुसरथन।

Gulal Verma Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned