सब्दभेदी बान चलइया कोदूराम वरमा

सुरता म

By: Gulal Verma

Published: 06 Apr 2021, 11:17 PM IST

हमन लइका राहन त हमर गांव नगरगांव म हर बछर नवधा रमायन के कारयकरम देखन-सुनन। ऐकर आखिरी दिन एकझन सियान के धनुस बान के कारयकरम देखन। उंकर आंखी म कपड़ा के टोपा बांध देवंय। तहां ले दू तीन भांवर किंजार देवंय। वोकर बाद एकठन लकड़ी म सूंत बंधे नान्हे लकड़ी ल घुमावंय। फेर, एक आने मनखे ह वो सूंत बंधाय लकड़ी तीर जाके एकठन गिलास ल बजावय। तहां ले आंखी म टोपा बंधाय सियान ह वो गिलास बाजे के दिसा म किंजर के अपन हाथ म धरे धनुस ले बान ल छोड़ देवंय। देखते देखत वो बान ह जेमा धारदार लोहा के एक टुकड़ा लगे राहय, तेमा वो घूमत सूंत ह कटा के गिर जावय।
लोगन खुस होके ताली बजावंय। हमूंमन बजावन। फेर, वो लइकई अवस्था म वोकर महत्व ल नइ समझत राहन। जब धीरे-धीरे बड़े होवत गेन अउ ऐकरे संग समझ बाढ़त गिस त जानेन के वो सब्दभेदी बान के परदसरन रहिस हे ,जइसे के नवधा रमायन म सुनन के राजा दसरथ ह हिरन के भोरहा म अपन भांचा सरवन कुमार ल मार परे रिहिस हे। बाद म तो वो सब्दभेदी बान के संधानकरता कोदूराम वरमाजी (वर्मा) के कारयकरमल कतकों जगा देखे बर मिलिस। उंकर गांव भिंभौरी म मोर एक साढ़ूभाई राहय, तेकरो सेती भिंभौरी जाना होवय। उहों कतकों बखत भेंट हो जावय
13 अक्टूबर 2015 के दिन कोदूरामजी के संग मेहा मगरलोड गेंव। रद्दाभर मेहा उंकर संग मुंहाचाही करे लगेंव। मोर मन म सब्दभेदी बान के बारे म जाने के बड़ इच्छा रिहिस, तेकर सेती सुवाल इहें ले चालू करेंव। त वोमन बताय रिहिन- मेहा लोककला के छेत्र म पहिली आएंव। जब मेहा 18 बछर के रेहेंव त आज जइसन किसम-किसम के बाजा रूंजी नइ राहत रिहिस हे। वो बखत सिरिफ पारंपरिक बाजा- करताल, तम्बुरा आदि ही मुख्य रूप ले राह। एकरे सेती मेहा करताल अउ तम्बुरा के संग भजन गाए बर चालू करेंव। अध्यात्म डहर मोर झुकाव पहिलीच ले रिहिस हे। तेकर सेती मोर कला के सुरुआत भजन के माध्यम ले होइस।ॉ
नाचा म जोक्कड़ बनिस : कोदूराम वरमाजी कहिस - वोकर पाछू बछर 1947-48 म मेहा नाचा डहर आकरसित होएंव। नाचा म मेहा जोक्कड़ बनंव। पहिली ऐमा खड़े साज के चलन रिहिस हे। फेर हमन दाऊ मंदराजी ले परभावित होके तबला हारमोनियम संग बइठ के परस्तुति दे लागेन। वो बखत अंगरेजमन के सासन अउ मालगुजारी परथा रिहिस हे। तेकर सेती हमरमन के बिसय घलो ऐकरेमन ले संबंधित रहय।
अकासवानी म गायक रिहिन : कोदूराम जी असासवानी के घलो गायक कलाकार रहिन। वोमन बताय रिहिन के, बछर 1955-56 म लोक कलाकार के रूप म अकासवानी म पंजीकृत होगे रेहेंव। फेर मेहा उहां जादा करके भजने गावंव। मोर भजन म . ‘अंधाधुंध अंधियारा, कोई जाने न जानन हारा’, ‘भजन बिना हीरा जनम गंवाया’ जइसन भजन वो बखत भारी लोकप्रिय होय रिहिसे।
गंवई के फूल : कोदूरामजी दाऊ रामचंद्र देसमुखजी के ‘चंंदैनी गोंदा’ ले परभावित हो के ‘गंवई के फूल’ नाव ले एक सांस्कीरितिक दल घलो बनाए रिहिन हें।
सब्दभेदी बान : वोमन बताय रिहिन के, वो बखत मेहा भजन गावंव। वोकर संगे-संग दुरुग वाले हीरालाल सात्त्री के रमायन सेवा समिति संग घलो जुड़े राहंव। उही बखत उत्तरपरदेस के बालकिरिस्न सरम (बालकृष्ण शर्मा) आय रिहिन। जब सास्त्रीजी रमायन के प्रस्तुति करंयं, वोकर आखिर म बालकिरिस्न सब्दभेदी बान के प्रस्तुति करंय। मेहा उंकर ले भारी परभावित होएंव। तहां ले उहीमन ले तीन महीना के कठिन अभ्यास ले महूं सब्दभेदी बान चलाए बर सीख गेंव। सब्ददभेदी बान चलई ह सिरिफकला के परदससन नोहय, भलुक, एक साधना आय। ऐकर बर हर किसम के गलत काम, बिचार, गलत सोच ले मुक्त होय बर परथे। मोर जगा कतकोनझन सब्दभेदी बान सीखे खातिर आवंय, फेर साधना म कमजोर रहे के सेती कोनों पूरा पारंगत नइ हो पाइन।
कला बर मिलिस सम्मान :
मेहा बातचीत म कोदूराम वरमा (वर्मा) से पूछेंव रहेंव के सब्दभेदी बान के सेती सरकार डहर ले आपमन ल कोनो सम्मान मिले हे का? वोहा बताय रिहिन के सब्दभेदी बान के सेती तो नइ, फेर कला खातिर जरूर मिले रिहिस हे। केन्द्र सरकार ह बछर ् 2003-04 म गनतंत्र (गणतंत्र) दिवस परेड म करमा नृत्य परदरसन खातिर बलाय गे रिहिस। उहां हमर मंडली ल सबले बने घोसित करे गे रिहिस।

Gulal Verma Desk
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