गुदड़ी के लाल

समाज

By: Gulal Verma

Published: 19 Apr 2021, 05:14 PM IST

भेलई के तीर एकठन गांव हे गनियारी। वइसे तो गनियारी ह विख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजनबाई के नांव ले परसिद्ध हे। जउन पद्मभूसन हे। फेर, इही गांव अउ इही मुहल्ला एक अउ लइका बड़ होनहार निकलिस। जेकर नांव हे-मंगलू पारधी। ये बस्ती एक पिछड़ा बस्ती हरे। फेर, अब समे के संग पारधी जात के घलो बिकास होवत हे। तभो ले आज वोमन आरथिक अउ सैक्छिनिक ढंग ले पिछवाय हावय। ऐकरमन के मुख्य बेवसाय बाहरी (झाड़ू) अउ सरकी बनाई अउ बेचई हरे। बिहिनिया ले सुत उठके खार जवई, सांझ के मुड़ म छिंद के पत्ता के गठरी ल बोह ले लवई। समे-समे म दू-चार चिरई मरई। बंभरी के दतवन काट के बेचई।
इही बीच मंगलू पारधी ददा स्व. किसुन पारधी अउ दाई स्व. सांतिबाई पारधी के बेटा के रूप म जनम होइस। तीन भाई म सबले छोटे मंगलू ल बिरासत म मिलिस बाहरी, सरकी बनाय बर छींद अउ फांदा। मंगलू ले छोटे एक बहिनी होइस। मंगलू जइसे लइका ल ही गुदड़ी के लाल कहिथन। अनपढ़ दाई-ददा अउ पिछड़े बस्ती म जनमे मंगलू ह गांव के इस्कूल म पढ़ के आठवीं पास होगे। गरीबी म बारहवीं पढ़ डरिस। वोकर दाई-ददा जानिब नइ करय कि वोहा कतेक पढ़ डरिस। भेलई तीन के कालेज म बीए म भरती होइस। इसी बीच म फिटर ट्रेड म आईटीआई घलो कर डरिस। फेर कालेज म भरती होगे एमए कर डरिस। वइसन माहौल म मंगलू ह ‘नायक’ निकलिस।
थोकिन समे बाद उही मंगलू ह सिक्छाकरमी बनगे अउ आज सहायक सिक्छक हे। पारधी समाज के लोगनमन वोकर परतिभा ल चिन्ह के समाज के जिला अध्यक्छ बना दिस। तब मंगलू ऊपर समाज ल नवा डहर देखाय के जिम्मेदारी आ गे। इस्कूल के लइकामन ल पढ़ा के चेतना जगावत हे। संग म अपन समाज के कुरीति ल दूरिहाय के कोसिस करत हे। समाज के लोगनमन ल नसापान नइ करे बर समझावत हे। सिक्छा के महत्तम ल बतावव हे। समाज ल आगू बढ़ाय के धरम ल अब मंगलू ह निभावत हे।
मय इही गांव के इस्कूल म इही बस्ती म जब लइकामन ल इस्कूल लाय बर प्रेरित करथव त जरूर कहिथंव कि तुमन घलो पढ़व-लिखव। देस के सफई बर बाहरी जरूरी हे। फेर, अपनमन के सफई बर गियान जरूरी हे। तुमन मंगलू पारधी ले सीख लेवव- पढ़बो, लिखबो अउ अपन जिनगी ल गढ़बो।

Gulal Verma Desk
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