एक लोटा पानी

नानकीन किस्सा

By: Gulal Verma

Published: 15 Jun 2021, 03:41 PM IST

सोमू ह पहिली पइत गांव आये रहिस। वोहा सहर म सरकारी नौकरी करे। अपन मोसी इहां गांव म आये रहय। जइसने सोमू ह मोसी के दुवार म पहुंचिस तहाले घर के देहरी म वोकर भौजी ह वोला एक लोटा पानी दिस अउ कहिस- बने गोड़ -हाथ ल धो लेवव देवर बाबू। सोमू ल अचरज होइस कि देहरी म गोड़-हाथ धोथें। फेर, चुपेचाप गोड़-हाथ ल धोके भीतरी आइस त का देखते। कुरिया ह गोबर ले लिपाये बहराय रहय। सोमू ल मोसी ह खटिया म बइठाइस अउ जम्मो हाल ल पूछिस। वतकेच म भौजी घर के दही के लस्सी अउ लेवना ले आइस।
मंझनियाकुन बने दार -भात अउ पताल के चटनी अउ जिमीकांदा के साग सन सोमू जीभर के खाइस। सोमू ह मोसी ल पूछिस- तोर तबियत वबियत ठीक हे न मोसी। मोसी कहिस- हमन तो बेटा कभु बीमार नइ परन। काबर कि घर के साग-सब्जी, दार चाउंर, दूध दही जम्मो जिनिस ल खाथन। सहर म जम्मो जिनिस ल तुमन बिसाथव।
आजकल सब्बो जिनिस म दवई होथे। जेन ह बीमारी बढ़ाथे। हमन देहरी म एक लोटा पानी पहुनामन ल देथन त गोड़ हाथ सन जे बीमारी आथे तेन घर भीतरी न िहमाये। अइसने कहत मोसी ह मुस्काइस।
सोमू कहिस- ते सिरतोन कहत हस मोसी। ये सब हमर जुन्ना परम्परा आय। पहिली के सियानमन तभे बीमार नइ परंय। सौ बछर ले स्वस्थ जिये। फेर, तुंहर एक लोटा पानी म पहुनामन के इज्जत अउ सम्मान घलो हे। आज के कोरोना म घलो अब घर-घर गोड़ -हाथ धोवई चलत हे। गांव के परम्परामन ल फेर हमन ल अपनाय बर परही। तभे हमन स्वस्थ अउ सुखी होबोन। सबोझन वोकर म मुड़ी हला के हामी भरिन।

Gulal Verma Desk
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