छत्तीसगढ़ म पत्रकारिता के जनक पं. माधवराव सप्रे

सुरता म

By: Gulal Verma

Published: 21 Jun 2021, 03:27 PM IST

पं. माधवराव सप्रे मध्यपरदेस के रास्टरीय अउ साहित्य जागरन के पितामह रिहिस। छत्तीसगढ़ म लोगनमन ल घलो स्वाधीनता संग्राम के सुरू बछर म राजनीति चेतना के रद्दा बताइस रिहिस। देससेवा अउ साहित्यिक सेवा के जउन आदर्स वोहा इसथापित करें हे। उहींं म चलके छत्तीसगढ़ ह सब जगा नवा रद्दा अउ मान ल पाइस।
पंडित माधवराव सप्रे के जनम 19 जून 1871 म मध्यपरदेस के दमोह जिला के पथरिया गांव म होइस। वोकर ददा के नाव बाबूराव अउ दाई के नाव लछमी बाई रिहिस। रोजी-रोटी म बाबूरावजी हमर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर म आके रहे ल लगिस। माधवरावजी के सुरू के सिक्छा ह बिलासपुर म होइस।
बीए के परीक्छा पास करके के बाद सप्रेजी ह अपन जम्मो बेरा, जिनगी ल देस के सेवा अउ साहित्य सेवा म लगाइस। बछर 1899 म पेंड्रा के राजकुमार कॉलेज म अंगरेजी के गुरुजी रिहिस। वोहा इही कॉलेज म पढ़े घलो रिहिस। वो बेरा सप्रेजी के ददा कांकेर के दीवान रिहिस। सप्रेजी ल तहसीलदार के नौकरी मिलिस, फेर वोहा सरकारी नौकरी नइ करव कहिदिस।
छत्तीसगढ़ मित्र पत्रिका सुरू करिस
बछर 1900 म सप्रेजी पं.वामनराव लाखे अउ रामराव चिंचोलकर के संग मिलके अभी के गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिला के पेंड्रा ले ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ नामक मासिक पत्रिका के परकासन सुरू करिस जउन छत्तीसगढ़ के पहिली पत्रिका आय जेकर जनमदाता सप्रेजी रिहिस। वामन लाखेजी पत्रिका के परकासक अउ सप्रेजी संपादक रहिन। बड़ जल्दी छत्तीसगढ़ मित्रह विद्वान अउ साहित्यकारमन म सम्मान पाइस। पं. महावीर परसाद द्विवेदी, सिरीधर पाठक, पं.कामता परसाद गुरु, रामदास गौड़ मन जइसे साहित्यकार मन ये पत्रिका के लेखक रहिन।
हिंदी केसरी
डॉ. मुजे के सहयोग ले नागपुर ले ‘हिंदी केसरी’ के परकासन अउ संपादन पं. माधवराव सप्रेजी ह 13 अप्रेल 1907 म सुरू करिस।‘हिंदी केसरी’ म काला पानी, बम के गोले का रहस्यश्, जइसे राजद्रोहात्मक लेख सप्रेजी के लिखे हे। तेकर सेती 22 अगस्त 1908 म वोला धारा 124 के भीतर राजद्रोह बगराय के बद्दी म गिरफ्तार करलिस।
आनंद समाज पुस्तकालय
1900 के बछर म ही पं. माधवराव सप्रेजी के बताय रद्दा म रायपुर म कंकालीपारा रद्दा के आनंद समाज पुस्तकालय के नेह रखाइस। ये पुस्तकालय रास्टरीय चेतना अउ राजनीतिक बिचार मंथन के नगर म एकठो केन्द्र रिहिस। छत्तीसगढ़ मित्र के परकासनन बंद होय के बाद बछर 1905 म सप्रेजी ह नागपुर म ‘हिंंदी ग्रंथ परकासन मंडली’ के इसथापना करिस। ये ग्रंथमाला म कुछ सुघ्घर बढिय़ा ग्रंथ मन के परकासन करें गिस। सप्रेजी के लिखें पुस्तक पुस्तक स्वदेसी आंदोलन अउ बायकाट नामक पुस्तक इहीं ग्रंथमाला म परकासित होइस।
16 ग्रंथ लिखे हें
सप्रेजी लगभग 16 ग्रंथ लिखें हे। जेन म वोकर मौलिक अउ अनुवादित ग्रंथमन हवय। सप्रेजी ह सैकड़ो लेख लिखें हे, जउन वो बेरा के पत्र-पत्रिकामन म छपत रिहिस। वोहा जिनगीभर तियाग अउ तपस्या भरे जिनगी ल गुजर-बसर करत देस सेवा, हिंदी भासा अउ साहित्य सेवामन म लगाय के बुता करिस। ऐतिहासिक छेत्र म सप्रेजी के व्यक्तित्व के सही मूल्यांकन अभी तक नइ हो सकिस।
सप्रे जी ह छत्तीसगढ़ म अगियान के बगरे अंधियार ल हटाय के रास्टरीय जागरन अउ साहित्य चेतना के अलख जगाइस। वोकर बर छत्तीसगढ़ आज ले करजदार हे। महान दारसनिक अउ गांधीवादी चिंतक पं. रामदयाल तिवारी अउ परसिद्ध कवि, निबंधकार, लेखक बाबू मावलीपरसाद सिरीवास्तव, पं.माधवराव सप्रेजी के चेला रहिन। रास्टर कवि माखनलाल चतुवरदी अउ नाट्यकार सेठ गोविंददास के घलो साहित्यिक अउ राजनीति गुरु सप्रेजी ह रिहिस। सप्रेजी ह छत्तीसगढ़ के सहित्य जगत म अड़बड़ बुता करें हे। 23 अप्रैल 1926 म सप्रेजी ह हमर बीच नइ रहिन।

Gulal Verma Desk
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