योग राखथे सांत मन अउ निरोग तन

बिस्व योग दिवस बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 21 Jun 2021, 03:33 PM IST

आज मनखे के जिनगी म सुख, सांति नइये। दुख -पीरा म चारोमुड़ा ले घेराय हे। रोजदिन सांंति खोजत हे, फेर पावत नइये। कहे गे कि जउन मनखे के जिनगी म सांति नइयेे वो सुखी नइ रही सकय। पुरखामन बताय हे- ‘अशांतस्य कुतरू सुखम्।’ आज मनखे के तन अउ मन दूनों जगा रोगराई समाय हे। रोगराई ल भगाय पाछू सुख अउ सांति मिलथे। रोगराई ल भगाय बर योग के उदीम करेबर परही। योग, बियाम, परानायाम, धियान के रद्दा धरे बर परही, जेला हमर पुरखा रिसि-मुनिमन बताय हे। कहे गे हे कि सुखी जिनगी पाय के रद्दा योग ले मिलथे।
योग बिद्या ह हजारों बच्छर जुन्ना आय, जब चिकित्सा ह नइ रहिस तब योग रहिस। नाड़ी गियान घलो इही ध्यान योग के एक रूप आय। भगवान सिव योग बिद्या के पहिलांत गुरु अउ आदि योगी आवय। सप्तरिसिमन ल सिव भगवान ह योग गियान देइस जउनमन संसार म ऐला बगराइस। पाछू बहुत अकन गुरु चेला बनिन। वैदिक काल म महरसि पतंजलि ह योग के सबो गियान ल सकेल के एकजाई करके अउ सिघियाके पातंजल योगसूत्र नाव के ग्रंथ म लिख के संसार ल देइस।
योग से संतुलित जिनगी जिये जा सकत हे
सुखी रहेबर मनखे के पांच तत्व, पाँच कोस, अउ पांंच परान, समभाव म होय बरचाही। योग ह सिखाथे कि कइसे संतुलित जिनगी जीये जा सकत हे। योग तन, मन अउ बुद्धि ल जोड़थे। हर मनखे के सपना होथे सुग्घर अउ निरोगी काया। कहे गे हावय योगश्चित्तवृतिनिरोधरूएयोगरू कर्मसुकौशलम् समत्वं योग उच्यते। योग आज संसारभर म जाने, सीखे अउ करे जावत हे। ऐहा मनखे ल मनखे ले जोड़त हे। संगे-संग स्वच्छता, सिस्टाचार, देसपरेम, परयावरन, नसामुक्ति बर जागरूक करथे। संसार ल हमर देस के इही संदेस आय- ‘सर्वे भवन्तु सुखिनरू सर्वे भवन्तु निरामया।’ ऐकर सेती योग करव, रोज करव।

Gulal Verma Desk
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