हमरमन के करनी बर नराज झन होहू ‘बरसात पहुना’!

का- कहिबे

By: Gulal Verma

Published: 21 Jun 2021, 03:45 PM IST

बारिस के मउसम ह घलो गजब के ए। कब, कहां, कतका बरसही तेकर कोनो ठिकाना नइये। का-का रंग देखाही कहे नइ जा सकय। खबर हे के ये बछर मानसून ह बने रइही। देसभर म बने पानी बरसही। फेर, अभी ले देस के रक्सहू डहर तो कतकोन जगा बाढ़ के हालत बन गे हे।
हमर देस के जनतामन के किसमतेच ह अजीब हे, जउनमन कोनो मउसम होवय परेसानेच होथें। ऐमन ल परेसान करे के भगवान ह ओखी खोजत रहिथें, जइसे! कभु गरमी-लू चलाके, त कभु बारिस-बाढ़ लाके, त कभु जाड़-सीत बरसा के परेसान करे बर धरथे। अइसे लागथे, ये देस के लोगनमन के भाग म परेसान होय के सिवाय अउ दूसर जिनिस नइये। थोरकोन पानी गिरई ह कम-जादा होइस के भगवान ल कोसे बर धर लेथें। अब बतावव के का भगवान ह अपन काम-बूता ल झन करय? जुन्ना समे म का बाढ़ नइ आवत रहिस? अकाल-दुकाल नइ परत रहिस?
बरसात महराज! आपमन के इहू बछर सुवागत हे। आपमन के मड़माड़े बरसे ले हमन ल कोनो परेसानी नइये। काबर के हमन तो ‘पहुना’ ल भगवान मानथंन। अइसे आपमन के बिना ‘बाढ़ राहत’ बिभाग देखइया नेता- साहेबमन के तिजोरी नइ भरय। आपमन थोरको कमजोर होथव तहां ले ये भरस्ट नेता, अधिकारी, मुनाफाखोर बेपारीमन ल अपन फाइदा ह खतरा म परत दिखई देथे।
बरसात पहुना! आपमन आवव, चाहे झन आवव। बिपक्छी दल के नेतामन के दूनों हाथ म लाड़ू रहिथे। अकाल परय, चाहे बाढ़ आवय चउमास म अपन नेतागिरी ल चमकाय, सरकार ल कोसे अउ जनता के हितवा बने के वोमन ल अड़बड़ मउका मिलथे। जेती देखबे वोती लोगनमन बचाव-बचाव कहिके चिल्लात रहिथें। अइसने मउका ल ‘बिलई ताके मुसवा, बारी म सपट के’ जइसे बिपक्छी दल के नेतामन जोंगत रहिथें। धरना-परदरसन करथें। पेपर म फोटू छपवाथे। भुक्तभोगीमन ल मदद-मुआवजा मिलय, चाहे झन मिलय, फेर ऐकरमन के नेतागिरी के बछरभर के कोटा ह जरूर पूरा हो जथे।
बरसात देवता! हमर छत्तीसगढ़ ह धान के कटोरा ए। खेती-किसानी ले जिनगी चलथे। अउ कतेक ल बतावन, आपमन तो जानबेच करथव। पानी के बिना न जिनगी चलय, न खेती-बाड़ी होवय। जरूरत मुताबिक समे म आपमन बरसहू, न कमती, न जादा। किरपा करके आंधी-तूफान, बारिस ल सकऊ रखहू।
परयावरन परदूसित होगे हे। परकीति ह गुस्सा गे हे। हर बछर बाढ़ म धन-जन के मड़माड़े नुकसान होथे। केदारनाथ के बाढ़ के सुरता आथे। तभो ले सरकार ह न परदूसन फइलइया, रूख-राई कटइयामन ल जेल म डारय, न बाढ़ रोके के पुख्ता उपाय करय। लोगनमन ल किसमत के भरोसा छोड़ देथे, त अउ का-कहिबे।

Gulal Verma Desk
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