रजुतिया : जगन्ननाथ पुरी के रथयातरा

परब बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 12 Jul 2021, 04:04 PM IST

रजुतिया परब ह असाढ़ महिना के अंजोरी पाख के दूज के दिन होथे। ए दिन भगवान जगन्नाथ, सोहदरा अउ बलभद्र ल रथ म बइठार के किंजारे के रिवाज हे। अइसे तो ए परब ल हमर देस के जम्मो ओन्हा-कोन्हा म मनाय के रिवाज हे। फेर, ओडिसा के जगन्नाथानपुरी म अलगेच ढंग ले उछाह-मंगल के संग बिसेस ढंग ले तइंहा जुग ले मनावत आवत हें। काबर के ए परब मनाय के सुरवात जगन्नाथपुरीच ले होय रहिच। इही दिन भगवान अपन ससुरार जनकपुर गे रिहिस तब ले आज तक ऐला मनावत आवत हें।
हमर देस म चार धाम के चार तीरथ म एक धाम जगन्नाथ पुरी आय। ऐेहा भारतीय मंदिर सिरजन कला के सिरोमनि चिन्हा आय। लोगनमन के अइसे मानना हे कि ए मंदिर ल भगवान बिसकरमा अपन हाथ म खुदे बनाय हे। इहां के रथ जातरा ह दुनियाभर म परसिद्ध हे। ऐहा अइसे तीरथ ए जिहां जात-कुजात, भले-कुभले जम्मो जातरी न एके जघा बइठ के जगन्नाथ के अइटका अउ खिचरी के भोजन परसाद पाथे। भोग लगाय उपर ले बांचे खिचरी ल महापरसाद कइथें। इही महापरसाद के मितान घलो बदथें। मंदिर के देवता के मूरति ल रथ जातरा के बेरा म कोनो मनखे रथ ल झींच सकथे। ए दिन मूरति ल साल म एक बेर बाहिर निकाल के सहरभर किंजारथें।
सिरी जगन्नाथ के रथ पंदरा हाथ ऊंच, बाइस हाथ लाम अउ वोतके चाकर रथे। ऐमा चार हाथ के गोलई चउक-चाकर वाले सोलाठन चक्का लगे रइथे। बलदाऊ के रथ ऐकर ले एक फूट छोटे बारा चक्का वाले अउ सोहदरा के रथ बलराम के रथ ले एक फूट छोटे अउ एकरो रथ ह बारा चक्का वाले रथे। हर बछर नवा रथ बनाय जाथे।
जगन्नाथ भगवान, सोहदरा अउ बलराम ए तीनों झन ल मंदिर के सिंग मुहाटी ले रथ म बइठार के जनकपुर डहर झिंकत लेगथें। रथ के झिंकइया मनखेमन चार हजार दू सौ अकन रइथे। जनकपुर म तीन दिन ढार परथे अउ लछमी संग मिल-भेंट के फेर मंदिर लहूट के आ जथे। रजुतिया के दिन ल सुभ दिन माने जाथे। ए दिन किसानमन धान बावत के घलो मुहरत करथें। आघू के दिन म बिहाव-पठौनी होय के बाद दूसरइया लिहे बर घलो जांय। नावा कुआं, बउली, तरिया अउ नावा घर के पचीस्ठा घलो रजुतिया के दिन कराथें।

Gulal Verma Desk
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