‘पहलाजी चोर’ म परिवारिक समसिया ले निकले के बताय हे रद्दा

किताब के गोठ

By: Gulal Verma

Published: 13 Sep 2021, 05:34 PM IST

कोनो भी साहित्यकार के रचना ल समीक्छा करई आसान नइ होय। ऐहा एक अइसन काम होथे जइसे के भरे समुंदर म बूड़ के मोती निकलई। टीकेस्वर सिन्हा ‘गब्दी वाला’ के किताब ‘पहलाजी चोर’ के नाम ल सुन के ही मनखे सोचें ल धर लेथे। असल मा ये किताब ल पढ़ही तभे समझ माआही।
आज रचनाकारमन हर सिरिफ कविता लिखे तक म सीमित हो गे हे। निबंध, कहिनीमन पाछू होवत जावत हें। आजकल के लइकामन ह कहिनी ल पढ़े म पाछू हे। अइसन म टीकेस्वर सिन्हा ह छत्तीसगढ़ी कहिनी विधा ल आगू बढ़ाय के उदीम करे हे। वोकर सरलग परयास से छत्तीसगढ़ी कहिनी संग्रह के सपना लगभग पूरा होगे हे।
ये किताब म ‘मया-पिरीत’ भाई बहिनी के अटूट परेम, सद्नोहरा, प्रदीप मान गे, मोला कभू पति झन मिलै, नियाव, लेडग़ा, अबोला, बड़े थारी, गरुवा के सुध, पहलाजी चोर, जमुना के जल, समय न होत एक समान, रतन-रफीक, इस्कूल के उन्मुखीकरन, सेत के जोत जंवारा, तिजहारिन, तिरंगा के नीचे खड़े हंव, नवा बिहान, साढ़े तीन हाथ जमीन, इंदरमन के काठी म।
नदावत छत्तीसगढ़ी सब्दमन के परयोग
टीकेस्वर सिन्हा ह अपन ननपन के सुने कहिनीमन ल घलो सरेखे हे अउ अपन सब्द म पिरोय के कोसिस करे हे। ये कहिनी संग्रह म परिवारिक नता-रिस्ता बर जिम्मेदारी अउ परिवार बर मया ल बताये के कोसिस करे हे। कहिनी के माध्यम से परिवारिक समस्या से कइसे निकले जा सकत हे अउ गांव म रहइया मनखे बर मया-पीरित ल घलो बताये के कोसिस करे हे। हमर नदावत छत्तीसगढ़ी भाखा के सब्दमन के परयोग करे हें। आसा करथौं की ‘पहलाजी चोर’ ह जन-जन म बगरही। टीकेस्वर सिन्हा ‘गब्दीवाला’ अपन साहित्य कला म आगू बढ़े अउ अपन साहित्य के खुसबू ल लोगन के हिरदय म बिखेरत रहे।

Gulal Verma Desk
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