नवरात के बिग्यानिक महत्तम

परब बिसेस

By: Gulal Verma

Published: 11 Oct 2021, 04:52 PM IST

नौ fदन नवरात म यग्य- हवन के बिसेस महत्तम होथे। यग्य ले निकले कुहरा स्वास्थ बर फायदेमंद होथे। यग्य ले निकले कुहरा सिरिफ मनखे बर लाभदायक होथे अइसे बात नइये, बल्कि ये कुहरा ह जानवर, चिरई-चिरगुनमन बर घलो फायदेमंद होथे। सांस ले ये कुहरा ह जीव के देह म पहुंचथे। जउन ह जीवानु-कीटानु ल खत्म करे के काम करथे। यग्य ल अग्निहोत्र घलो कहे जाथे। जेकर मतलब होथे पानी, हवा, भुइंया ल सुद्ध करे बर देवइया आहुति।
यग्य म जउन समिधा डारे डाथे वोमा 4 किसम के जिनिस मिलाय जाथे। सुगंधित- जेमा रहिथे केसर, अगर, तगर, चंदन, इलायची, जायफर, जावित्री, छबीला, कपूर, कचरी, बालछड़ अउ पानडी। पुस्टिकारक - घी, गुग्गगुल, सूखा फल, जौ, तिल, चाउर, मधुरस, अउ नरियर। रोगनासक - गिलोय, सोमवल्ली, ब्रह्मी, तुलसी, इंद्रजव, औरा, मालमाँगनी, हरताल, तेजपत्ता, प्रियंगु, सफेद चंदन अउ जटामासी। मिस्ठान- जेमा होथे गुड़, छुहारा अउ दाख। अतेक बिग्यानिक ढंग से बनाय समिधा के जब आहुति दे जाथे तब ऐकर कुहरा लेे जम्मो जीव जगत अउ वातावरन म रहइया कीरा-मकोरामन के खात्मा कर देथे। यग्य सिरिफ करमकांड नोहय, बल्कि चिकित्सा पद्धति आय।मंत्रोच्चार से घलो हमर मन-मस्तिस्क अउ आत्मा म सकारात्मक परभाव आथे। यग्य ल हवि घलो कहे जाथे, जेकर अरथ होथे जहर ल हरइया।
बिग्यान के मुताबिक कोनो भी जिनिस ह खत्म नइ होवय। सिरिफ वोकर रूप बदलथे। हवन म हमन जउन भी जिनिस डारथन वोहा नस्ट नइ होवय, बल्कि वोहा दूसर रूप म बदल के हमीमन ल मिलथे। जब ये कुहरा ह कतकोन जीव-जंतु के देह म जाथे तब ऐहा परोपकार के रूप घलो ले लेथे। यग्य म अइसे लकड़ी के परयोग करे जाथे जउन ह स्वास्थ्य बर लाभदायक हो।

Gulal Verma Desk
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