पुतरा-पुतरी के बिहाव

पुतरा-पुतरी के बिहाव

Gulal Prasad Verma | Publish: Apr, 17 2018 07:40:44 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ी संस्करीति

रायपुर। छत्तीसगढ़ म बछरभर कोनो न कोनो तिहार महीना के मुताबिक होथे। सबो तिहार के अपन महत्व होथे। अकती ह छत्तीसगढ़ के लोक तिहार म परमुख तिहार आय। जेहा बैसाख महीना के अंजोरी पाख के तीज के दिन परथेे। ये तिहार ल अड़बड़ उमंग, उछाह अउ हंसी खुसी ले मनाए जाथे।
कहे जाथे ये दिन जेन मनखेमन अपन पुरखा ल अकती पानी देथे तउन ह सोझे वोमन ल मिल जाथे। बरम्हा के बेटा अक्छय ह इही दिन पइदा होय रहिस हे।
अकती के दिन गांव-सहर म लइकामन पुतरा-पुतरी के बिहाव रचाथे। तेमे पारा-मुहल्ला के जम्मो सियानमन घलो आथें। तेल हरदी चघाथें। मउर बांधथें। दूल्हा-दुल्हिन ल सवांगा पहिनाथें। भांवर किंजरथें। टिकावन बइठार के धरम टीका टिकथें अउ सुगघर बिहाव गीत गाथें। इही धरम ले ... धरम हे गा...आगा मोर भैया.....। सुग्घर लगन - अकती के दिन बिहाव के सबले सुग्घर सगन होथे। कतको जगा आदरस समूहिक बिहाव के आयोजन घलो होथे। काबर के ये दिन पोथा-पथरी के देखे के जरूरत नइ परय। ये दिन के मुहुरत ल सुभ-सुभ रहिथे।
ये दिन गांव म बिहनिया ले जम्मो किसानमन परसा पान के दोना बना के धान ल दोना म भर के ठाकुर देवता म चघाथें। बइगा पूजा-पाठ करथे। बछरभर ले बंधाय पैरा के लोटना के बिजहा धान ल खोल के जम्मो चघे धान म मिलाथे। वोकर बाद ठाकुर देवता के अंगना म मनखेमन नागर खिंच के जोताई करके धान बोथें। तेकर पाछू गांव के जम्मो किसानमन ल लाइन से दोना म धान ल भर के बइगा ह बांटथें। वोकर बाद आगर बछर बर बांचे धान ल पैरा के बनाय लोटना म धर दे आथे। सबो किसान ह दोना म धान ल घर आथे, तब घर के मोहाटी म घर के कोनो भी मनखे पानी ओइछा के धान के पूजा-पाठ करथे। तहां घर के पूजा के जगा म रखथे।
इही दिन किसानमन दोना के धान ल धर के अपन-अपन खेत म जाथें। हूम-धूप, नरिहर ले धरती मइया के पूजा करथे। तहां ले पांच या सात कुदारी खनथें अउ धान ल छितथे। इही दिन ले खेती किसानी के सुरुआत होथे।
हमर गंवई म ये दिन बछरभर किसान के घर म नौकरी करइयामन के छुट्टी होथे। घर म नौकर ल कमइया कहे जाथे। किसान ये दिन कमइया के आदर सत्कार करथे अउ नवा बछर बर फेर मोल -भाव करके लगाथे।

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