करलई हे भगवान, कइसे बांची लइकापन!

का-कहिबे...

By: Gulal Verma

Published: 24 Jul 2018, 07:15 PM IST

खेले-कूदे, पढ़े-लिखे के उमर म पांच बछर ले लेके चउदा बछर तक के करोड़ों लइकामन हमर देस म काम-बूता करत हें। लइकामन ल देस अउ समाज के भविस्य मानथें, फेर वोमन ल सिक्छित अउ बढिय़ा मनखे बनाय बर छोड़के काम-बूता करवई ह बड़ दुख अउ चिंता के बात ए।
लइकामन से काम कराय ल लेके लोगनमन के अलग-अलग राय हे। गरीबमन अपन लइकामन से काम-बूता करवई ल मजबूरी कहिथें। काम नइ करहीं त घर कइसे चलही, परिवार के पेट कइसे भरही। किसानमन कहिथें- लइकामन खेती-किसानी के काम-बूता म हाथ बंटाहीं तभे तो सीखहीं। सबो अपन-अपन धंधा म लइकामन ल सिखोवत हन कहिथें। अपन घर के काम-बूता करई अउ दू पइसा कमई ल कोनो गलत नइ मानंय।
गरीब परिवार के लइकामन एक डहर खराब हालत म काम-बूता करे बर मजबूर हें। दूसर डहर वोमन ल सारीरिक, मानसिक, आरथिक अउ यौन सोसन के सिकार घलो होय बर परथे। गरीबी के जाला ले बांचे बर जरूरी पढ़ई-लिखई अउ काम-बूता सीखे के गुंजाइस घलो अइसन लइकामन तीर कम होथे। ऐकर से न सिरिफ वोकरमन के बचपन वोकर से छीन लेय जाथे, बल्कि वोकर भविस्य ह घलो अंधियार होवत जाथे।
महंगई अउ बेगारी ह गरीबमन के जियई ल मुसकुल कर देय हे। गरीबमन ल दू जुअर के रोटी अउ परिवार पलई-पोसई के जुगाड़ ह घलो मुसकुल होवत हे। अइसन म कतकोन लइकामन पढ़े-लिखे बर चाहथें, फेर वोकर दाई-ददा ह दुविधा म पर जथे। लइका ल पढ़ई अउ परिवार चलई ह वोकर बूते के बाहिर दिखथे। सरकारी योजनामन से राहत के उम्मीद घलो नइ दिखय। जेमन ल जादा जरूरत हे, उहीमन ल सरकारी योजना के लाभ नइ मिलय।
गरीबी के सेती यदि कोनो नानपन म काम-बूता करे बर मजबूर हे त दाई-ददा ले जादा जिम्मेदार सरकार हे, जउन ह समाज म फइले गरीबी, असिक्छा अउ बेरोजगारी ल दूरिहा नइ कर सकत हे। जनकल्यानकारी नीति या योजना बनई भर नइ, बल्कि वोला बने ढंग ले लागू करई अउ जेकरमन खातिर बनाय गे हे, वोमन ल लाभ देवई ह घलो सरकारेच के जिम्मेदारी हे।
गरीब परिवारमन के दुरदसा अउ गरीब बस्तीमन के बदहाली ल देख के सहज अंदाजा लगाय जा सकथे के कतकोन गरीब परिवार भगवान भरोसा हें। जबकि, सरकार ह गरीबेचमन के हित खातिर कतकोन योजना चलावत हें। करोड़ों रुपिया खरचा करते हें। फेर, भरस्टाचार अउ सरकारी करमचारीमन के लापरवाही के सेती गरीबमन के मुसीबतमन नइ कमतियावत हे। कतकोन परिवारमन मजबूरी म अपन लइकामन के पढ़ई-लिखई ल छोड़वा के मजदूरी करावत हें।
सरकार के संगे-संग सामाजिक, धारमिक अउ स्वयंसेवी संगठनमन ल मिल के बाल मजदूरी ल रोके के कोसिस म जुटे बर चाही। लइकामन ल काम-बुता अउ अपराध ले दूरिहा रखई ह सबले जादा जरूरी अउ पहिली काम होय बर चाही। लइकामन से काम करवइया लोगनमन ल समझाय बर चाही। फेर, हमर देस-समाज म अइसन होवत नइ दिखत हे, त अउ का-कहिबे।

Gulal Verma Desk
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