एटीएम में कैमरा व कार्ड रीडर लगाकर धोखाघड़ी की कोशिश, एक गिरफ्तार, ठगों के जुड़े हैं मुंबई से तार

Lalit Singh

Publish: Oct, 12 2017 03:37:54 PM (IST) | Updated: Oct, 12 2017 08:21:35 PM (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India

राजधानी में आज एटीएम मशीन में कैमरा और कार्ड रीडर लगाकार धोखाघड़ी करने की कोशिश की गई। मामले में मौदहापाररा पुलिस थाने में अपराध कायम किया गया है।

रायपुर. राजधानी में आज एटीएम मशीन में कैमरा और कार्ड रीडर लगाकार धोखाघड़ी करने की कोशिश की गई। मामले में मौदहापाररा पुलिस थाने में अपराध कायम किया गया है। इसे लेकर एक आरोपी हिरासत में लिया गया है। मुंबई के ठगों ने कई लोगों को ठगने के लिए बड़ी स्तर पर प्लानिंग की थी। दूसरी ओर एक अन्य मामले में तेलांगना में जेवर चोरी करके उसका माल रायपुर के कारोबारी को बेचा जाता था। इस मामले की जांच करने के लिए तेलांगना पुलिस टीम रायपुर पहुंची चुकी है। इस मामले में सदर बाजार के कारोबारी से पूछताछ की जा रही है।

 

इधर, अंबिकापुर में ९६ करोड़ का घोटाला

जल संसाधन विभाग अंबिकापुर में ९६ करोड़ के घोटाले में शामिल अफसर जेल जाने के डर से फरार हो गए हैं। ईओडब्ल्यू ने उनके घरों में नोटिस चस्पा करने के बाद गिरफ्तारी की योजना बनाई थी, लेकिन टीम के आने के पहले ही वे गायब हो गए। आरोपियों की अनुपस्थिति को देखते हुए स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण) की न्यायाधीश नीरू सिंह ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है। श्

10 नवंबर को सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई १० नवंबर को होगी। इस दौरान आरोपी अफसरों के खिलाफ दस्तावेजी साक्ष्य सहित पूरक चालान पेश किया जाएगा। ईओडब्लू एसपी अरविंद कुजूर ने बताया कि टेंडर घोटाले में शामिल ३ अफसर सहित ११ ठेकेदारों के खिलाफ चालान पेश किया गया था। उन्हे आरोप पत्र के साथ कोर्ट में पेश किया जाना था। इसके लिए टीआई संजय देवस्थले के नेतृत्व में १५ सदस्यी टीम अंबिकापुर गई थी, लेकिन आरोपी नहीं मिले।

डाटा मिला: ईओडब्ल्यू को अफसरों के कम्प्यूटर में रखा हुआ डाटा मिला है। इसमें फर्जीवाड़े करने के महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं, लेकिन, पर्याप्त समय नहीं होने के कारण इसे जब्त कर अदालत में पेश नहीं किया जा सका। विशेषज्ञों की मदद से उनके इसे देखते हुए जांच एजेंसी ने अदालत से अनुपूरक चलान पेश करने के लिए समय मांगा है। ठेकेदार अतुल सिंह के द्वारा बिचौलिए के भूमिका अदा करने की जानकारी मिली है। इसे देखते हुए धारा १७३-८ के तहत उसके खिलाफ भी चालान पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष २०१५-१६ में अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए निविदा पेपरों में हेराफेरी की थी। ८ ठेकेदारों ने रिंग बनाकर अपने अनुसार पूरा ठेका ले लिया था। इस मामले में सरकार को लगभग ९६ करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया गया था।

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