सरकारी क्वारंटाइन सेंटर पसंद नहीं तो अपने खर्चे पर रहें होटल में, प्रशासन ने बनाया पे एंड यूज क्वारंटाइन सेंटर

रायपुर समेत कोरबा व अंबिकापुर के पेड क्वारंटाइन सेंटर में भोजन की भी व्यवस्था है जबकि राजनांदगांव में जो चार होटल आरक्षित किए गए हैं, वहां सिर्फ कमरा दिया जा रहा है, रूम सर्विस नहीं मिल रही है। यहां रुकने वाले घर से भोजन मंगवा सकते हैं।

By: Karunakant Chaubey

Published: 16 May 2020, 10:35 PM IST

रायपुर. लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से आने वालों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने जगह-जगह क्वारंटाइन सेंटर बनाए हैं। स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों समेत कई सरकारी व निजी भवनों को क्वारंटाइन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। यहां भोजन के साथ ही रुकने की सभी व्यवस्था है। इस सेंटर्स में सभी लोग नहीं रुक सकते इसलिए कई जिलों में प्रशासन ने होटलों को पेड एंड यूज क्वारंटाइन सेंटर के रूप में आरक्षित किया है।

रायपुर, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर समेत अन्य जिलों में होटलों को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है, जहां किराए का भुगतान कर 14 दिन की अवधि बीता सकते हैं। हालांकि रायपुर समेत कोरबा व अंबिकापुर के पेड क्वारंटाइन सेंटर में भोजन की भी व्यवस्था है जबकि राजनांदगांव में जो चार होटल आरक्षित किए गए हैं, वहां सिर्फ कमरा दिया जा रहा है, रूम सर्विस नहीं मिल रही है। यहां रुकने वाले घर से भोजन मंगवा सकते हैं।

राजनांदगांव : चार होटलों का किया गया चयन

लॉकडाउन के दौरान देश के चिन्हांकित शहरों मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल, गाजियाबाद और नोएडा से राजनांदगांव के रास्ते छत्तीसगढ़ आने वालों के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। सरकारी नि:शुल्क क्वारंटाइन सेंटर के अलावा प्रशासन ने चार होटल अमोरा रेवाडीह, होटल अवाना नया बस स्टैण्ड, होटल पंचशील रेलवे स्टेशन और होटल कंवर पैलेस रेलवे चयनित किए हैं, जिनमें होटल का शुल्क हजार से पंद्रह सौ रुपए तक का भुगतान कर रहा जा सकता है। हालांकि होटल में रहने के लिए सिर्फ कमरा ही मिलेगा, भोजन की व्यवस्था खुद ही करनी होगी। होटल में किसी तरह की रूम सर्विस नहीं मिलेगी। फिलहाल इन चारों होटलों में मिलाकर करीब 15 लोग रह रहे हैं।

रायपुर : कमरे में पहुंचाते हैं डिब्बाबंद भोजन

शुरुआत से ही रायपुर में एक निजी होटल को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। यहां बाहर से आने वाले ऐसे लोग, जो सरकारी क्वारंटाइन सेंटर में नहीं रहना चाहते तो उन्हें ये विकल्प मुहैया करवाया जा रहा है। इस होटल में पहले बफे सिस्टम के तहत, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाते हुए खाना परोसा जाता था, मगर अभी कमरे में डिब्बा बंद खाना दिया जाता है। शुरुआत में विदेश से आए काफी लोगों ने होटल के रूम बुक करवाए और भुगतान किया। हालांकि अब अधिकतर लोग घर में ही क्वारंटाइन हो रहे हैं, जबकि सरकारी क्वारंटाइन सेंटर झांझ, सेक्टर 24 और निमोरा में है, वहां भी कुछ लोग रह रहे हैं।

सरकारी सेंटर में हर तरह की व्यवस्था

राज्य में 150 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं, जहां 3100 लोगों को ठहराने की क्षमता है। ये सभी सुविधा संपन्न हैं। रायपुर के सेंटर में तो हर कमरे में टीवी, एसी भी है। इन्हें सरकार द्वारा खाना मुहैया करवाया जा रहा है। कपड़े धोने के लिए वाशिंग मशीन, चाय बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक केटली तक दी गई है। चप्पल, टॉवेल भी दिया जा रहा है।

कोरबा व अंबिकापुर में भी सर्वसुविधायुक्त क्वारंटाइन सेंटर

प्रशासन ने कोरबा जिले में दो प्रकार के क्वारंटाइन सेंटर बनाए हैं। एक पेड और दूसरा नॉन पेड। पेड क्वारंटाइन सेंटर होटल में बनाए गए हैं। किराया प्रशासन की ओर से निर्धारित किया गया है, जो प्रतिदिन 700 से 1500 रुपए तक है। ये क्वारंटाइन सेंटर एयर कंडिशन्ड हैं। भोजन की व्यवस्था अच्छी है। दूसरा नॉन पेड क्वारंटाइन सेंटर में गरीब मजदूरों को रखा गया है। इन्हें भोजन सरकार की ओर से दिया जा रहा है। नॉन पेड सेंटर छात्रावास या हॉस्टल को बनाया गया है।

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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