नहीं रहे आदिवासियों के मसीहा डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा, CM भूपेश ने किया शोक व्यक्त

नहीं रहे आदिवासियों के मसीहा डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा, CM भूपेश ने किया शोक व्यक्त
नहीं रहे आदिवासियों के मसीहा डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा, CM भूपेश ने किया शोक व्यक्त

Ashish Gupta | Updated: 23 Sep 2019, 01:12:51 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

आदिवासी बच्चों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ. प्रभुदत्त खैरा के निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त किया है।

रायपुर. आदिवासी बच्चों के मसीहा कहे जाने वाले डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा के निधन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री भूपेश ने ट्वीट कर अपने शोक संदेश में कहा, अचानकमार के घने जंगलों के बीच 30 साल तक कुटिया बनाकर बैगा आदिवासियों के बीच शिक्षा का उजियारा फैलाने वाले, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा के निधन की खबर सुनकर मन दु:खी है। डॉ खेड़ा त्याग, संकल्प और नि:स्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति थे।

डॉ. प्रभुदत्त खेड़ा का सोमवार को निधन हो गया। डॉ. खेड़ा ने बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में अंतिम सांसें लीं।
वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन पर आदिवासियों सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। मूलत: दिल्ली निवासी डॉ. पीडी खेड़ा ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों के लिए समर्पित कर दिया था। करीब 35 वर्ष पहले नौकरी छोड़कर आदिवासी अंचल के ग्राम लमनी में आदिवासियों के उत्थान के लिए काम करने पहुंचे थे और वहीं बस गए।

खुद फटेहाल रहकर गरीब बैगा आदिवासी बच्चों के लिए काम किया। खुद की पेंशन से आदिवासियों को पढ़ाया। चार-चार शिक्षक रखकर अचानक मार टाइगर रिजर्व क्षेत्र के छपरवा गांव में हाईस्कूल प्रारंभ किया। देखते ही देखते डॉक्टर खेड़ा प्रदेश ही नहीं पूरे देश में आदिवासी मसीहा के रूप में पहचाने जाने लगे।

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