सीएम को राज्यपाल की चिट्ठी पर मंत्री रविंद्र चौबे बोले, हम सबको मर्यादा में रहना चाहिए

- सचिव बदले जाने के बाद राज्यपाल (Chhattisgarh Governor Anusuiya Uike) ने पत्र लिखकर उनकी पसंद का पूर्णकालिक सचिव मांगा था, मंत्री चौबे ने कहा - कहा, किसी को अपनी सीमा लांघने का हक नहीं।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 16 Oct 2020, 01:52 PM IST

रायपुर. पूर्णकालिक सचिव की मांग वाली राज्यपाल अनुसूईया (Chhattisgarh Governor Anusuiya Uike) उइके की चिट्ठी पर संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे ने संवैधानिक मर्यादा का मुद्दा उठाया है। रविंद्र चौबे (cabinate minister rabindra chaubey) ने गुरुवार को कहा, सरकार और महामहिम की अपनी-अपनी सीमाएं हैं। संविधान प्रदत अधिकारों में सबके पावर ऑफ सेपरेशन उल्लेखित हैं। किसी को भी अपनी सीमा लांघने का हक नहीं है। हमने संविधान में देखा है और हमारा अनुभव है कि मंत्रिपरिषद की सलाह से ही राज्यपाल प्रदेश में सरकार की व्यवस्था को संचालित करती हैं। ये अंतिम लाइन है, हम सबको इसी मर्यादा में रहना चाहिए।

राज्य सरकार ने बुधवार को राज्यपाल के सचिव पद से आईएएस अधिकारी सोनमणि बोरा को हटाकर अमित कुमार खलखो को जिम्मेदारी दी थी। उसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री (CM bhupesh baghel) को पत्र लिखकर कहा था, राजभवन के लिए उनकी सहमति से पूर्णकालिक सचिव की नियुक्ति की जाए। राज्यपाल ने बुधवार को गृह विभाग की समीक्षा के लिए मंत्री ताम्रध्वज साहू और अफसरों को बुलाया था। क्वारंटाइन होने की वजह से गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने असमर्थता जता दी और बैठक स्थगित कर दी गई।


पहले भी हो चुका है टकराव

सुपेबेड़ा जाने को लेकर शुरुआत
पिछले वर्ष राज्यपाल ने गरियाबंद के सुपेबेड़ा गांव जाने की घोषणा की। उनका कहना था, उन्होंने हेलिकॉप्टर मांगा था जो नहीं मिला। उसके बाद उन्होंने कहा, उन्हें हेलिकॉप्टर मिले अथवा नहीं मिले वे वहां जाएंगी। इसको लेकर सरकार असहज हुई। स्वास्थ्य मंत्री खुद उनके साथ सुपेबेड़ा गए। यहां से टकराव की शुरुआत हुई।

कुलपतियों की नियुक्ति से बढ़ा
पिछले वर्ष विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों से सरकार और राजभवन में ठन गई। कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आरएसएस पृष्ठभूमि के बलदेवराज शर्मा की कुलपति पद पर नियुक्ति से यह टकराव बढ़ा।

विश्वविद्यालय कानून में संशोधन से गहराया
नाराज सरकार ने बजट सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम में बदलाव कर कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्यपाल (Chhattisgarh Governor Anusuiya Uike) का हस्तक्षेप सीमित कर दिया। राज्यपाल ने इस अधिनियम को वीटो कर दिया। इससे राजभवन और सरकार के बीच विवाद गहरा गया।

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