मनीष सिसोदिया के निशाने पर BJP-कांग्रेस, बोले - छत्तीसगढ़ में 18 साल में जरा भी हालात नहीं बदले

मनीष सिसोदिया के निशाने पर BJP-कांग्रेस, बोले - छत्तीसगढ़ में 18 साल में जरा भी हालात नहीं बदले

Ashish Gupta | Publish: Nov, 10 2018 03:31:50 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 03:31:51 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण का मतदान 12 नवंबर को होने जा रहा है। पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। आप के दिग्गज नेता मनीष सिसोदिया का कहना है, अब प्रदेश की जनता हम पर भरोसा जता रही है।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण का मतदान 12 नवंबर को होने जा रहा है। पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। कहीं बीजेपी की चर्चा है तो कहीं कांग्रेस की, वहीं जोगी कांग्रेस और आप पार्टी भी लोगों की बातचीत और बहस में शामिल है।

भाजपा जहां प्रचार के दौरान विकास की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और आम आदमी पार्टी बदलाव के मुद्दे को हवा दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ के चुनाव में पहली बार दस्तक दे रही आप के दिग्गज नेता व दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है, अब प्रदेश की जनता हम पर भरोसा जता रही है। चुनाव को लेकर मनीष सिसोदिया ने कुछ अंदाज में की पत्रिका के साथ बातचीत।

पत्रिका- प्रचार के दौरान अभी क्या माहौल दिख रहा है आपको?
मनीष सिसौदिया- माहौल काफी अच्छा है। गांव-गांव में बदलाव की भूख है। लोगों ने कांग्रेस को भी देखा है, भाजपा को भी देख रहे हैं। ओवरऑल लोग चाहते हैं कि बदलाव किया जाए। अभी तक उनके पास कोई विकल्प नहीं था। अब लोग आप को विकल्प के रूप में देख रहे हैं। दिल्ली में स्थापित विकल्प बनी है।

पत्रिका- छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह विकल्प कितना मजबूत है?
मनीष सिसौदिया- जब पहले चरण का मतदान होने जा रहा है, हमारे प्रत्याशियों की प्रोफाइल बहुत काम कर रहा है। दूसरे दलों ने वहीं घिसे-पिटे चेहरे उतारे हैं। हमारे सारे चेहरे बिल्कुल फे्रश हैं। जिस नई राजनीति की बात कर रहे हैं हम, वह हमारे नए और युवा चेहरों में दिखाई दे रही है। प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि बहुत अच्छी रही है। उनका पास्ट अच्छा रहा है। लोग उनपर भरोसा भी कर रहे हैं।

पत्रिका - तो क्या आप के ये नए चेहरे बदलाव का पर्याय बन सकते हैं?
मनीष सिसौदिया- बिल्कुल ये लोग बदलाव का पर्याय बन सकते हैं। क्योंकि लोग देख रहे हैं। जो मॉडल आम आदमी पार्टी लेकर आई है, वह अलग है। एक तरफ वह नए चेहरों के साथ आई है, उन चेहरों के साथ कोई लगेज नहीं है।

पत्रिका- आप के मॉडल में क्या अलग है?
मनीष सिसौदिया- छत्तीसगढ़ के लोगों को तो शिक्षा में बदलाव की सबसे अधिक जरूरत है। जिन संसाधनों के दम पर छत्तीसगढ़ का विकास होना था, उसी को लूट-लूटकर बाहर के लोगों का विकास हो गया। बड़े-बड़े लोगों, नेताओं का विकास होता चला गया, लेकिन छत्तीसगढ़ के आम आदमी का विकास नहीं हुआ। क्योंकि यहां एजुकेशन नहीं है। आदिवासी क्षेत्रों में लोग कह रहे हैं, अगर एजुकेशन हो गई होती तो इन संसाधनों का हम ठीक से उपयोग करते ना। इन्हीं संसाधनों को दिल्ली-मुंबई से आया कोई मैनेज करता है। विदेशों से लाकर कोई अफसर बैठाता है। इन्हीं संसाधनों का सही उपयोग कर हम अपना विकास कर लेते अगर एजुकेशन सही से मिल गई होती। आदिवासी केवल मजदूरी के लिए रह गया। आप के अलावा देश में एजुकेशन पर कोई बात नहीं कर रहा है।

पत्रिका- जो मुद्दे आम आदमी पार्टी उठा रही है, क्या वे वोटो में तब्दील होंगे?
मनीष सिसौदिया- शिक्षा एक शब्द है, लेकिन एक डिलीवरी है, जो हमने दिल्ली में किया है। आज दिल्ली के सरकारी स्कूल देश में सबसे बढ़िया बन गए हैं। दिल्ली के निजी स्कूलों पर लगाम लगाई है हमने। रायपुर से लेकर आदिवासी इलाकों में मैसेज तो खुला है। सूचना क्रांति की बदौलत गांव-गांव में दिल्ली का कॉन्सेप्ट पहुंचा हुआ है। जो हमारी टीम है उनमें बहुत पढ़े-लिखे लोग हैं, लोग उनपर भरोसा कर रहे हैं।

पत्रिका- चुनाव अभियान में अरविंद केजरीवाल क्यों नहीं आ पाए?
मनीष सिसौदिया- यह आप देख रहे होंगे। मैं देख रहा हूं कि संजय सिंह यहां आ रहे हैं। मंत्री हैं और कई राज्यों का प्रभार देख रहे गोपाल राय यहां लगातार बने हुए हैं। अलका लांबा कई बार आ चुकीं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार यहां बना हुआ है। आप अभी छोटी सी पार्टी है, उसके पास जो कुछ है वह झोंक रखा है।

पत्रिका- दिल्ली और छत्तीसगढ़ की राजनीति में क्या समानता और क्या फर्क दिखता है आपको?
मनीष सिसौदिया- दिल्ली में जो आदमी मजदूरी कर रहा है, रिक्शा चला है, झुग्गियों में रह रहा है, वह छत्तीसगढ़ के देहात जैसी जगहों से ही गया है। क्योंकि उसके गांव में सही एजुकेशन नहीं मिला। संसाधनों का सही से इस्तेमाल नहीं मिला। उसी आदमी को यहां ठीक ढंग से एजुकेशन मिल जाए तो वहां नहीं जाएगा। किसी भी सरकार के लिए छत्तीसगढ़ में काम करना दिल्ली की तुलना में ज्यादा आसान है। पिछले तीन साल से वहां केंद्र से लडऩा पड़ रहा हैं। वहां पुलिस हमारे हाथ में नहीं है, जमीन राज्य के हाथ में नहीं है। उसके बावजूद इतने बड़े परिवर्तन दिल्ली में हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ में वह समस्याएं नहीं है, लेकिन सरकारों के सामने, फिर भी यहां कुछ नहीं हुआ इसका मुझे आश्चर्य है।

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