जोगी बोले - कांग्रेस ने इतिहास से नहीं सीखा, लोगों के पास जकांछ-बसपा गठबंधन ही विकल्प

जोगी बोले - कांग्रेस ने इतिहास से नहीं सीखा, लोगों के पास जकांछ-बसपा गठबंधन ही विकल्प

Ashish Gupta | Publish: Nov, 10 2018 03:08:21 PM (IST) | Updated: Nov, 10 2018 03:08:22 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण का मतदान 12 नवंबर को होने जा रहा है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो अजीत जोगी इस चुनाव में खुद को प्रदेश के लिए बेहतर विकल्प बता रहे हैं।

रायपुर. छत्तीसगढ़ में प्रथम चरण का मतदान 12 नवंबर को होने जा रहा है। पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। कहीं बीजेपी की चर्चा है तो कहीं कांग्रेस की, वहीं जोगी कांग्रेस और आप पार्टी भी लोगों की बातचीत और बहस में शामिल है।

भाजपा जहां प्रचार के दौरान विकास की बात कर रही है, वहीं कांग्रेस, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और आम आदमी पार्टी बदलाव के मुद्दे को हवा दे रहे हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के सुप्रीमो अजीत जोगी इस चुनाव में खुद को प्रदेश के लिए बेहतर विकल्प बता रहे हैं। चुनाव को लेकर अजीत जोगी ने कुछ अंदाज में की पत्रिका के संवाददाता मिथिलेश मिश्रा से बातचीत।

पत्रिका- छत्तीसगढ़ के मौजूदा चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़-बसपा-सीपीआइ गठबंधन का क्या भविष्य है?
अजीत जोगी- इसमें कोई संदेह नहीं है, कि बसपा और सीपीआइ के साथ हमारा गठबंधन अपने दम पर सरकार बनाएगा। पहले चरण की 18 सीटों मेंं से अधिकतर पर उनका गठबंधन बहुत आगे है।

पत्रिका- मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ राजनांदगांव से चुनाव लडऩे की घोषणा कर मरवाही से चुनाव लड़ने की राजनीति क्या है?
अजीत जोगी - बसपा और सीपीआइ से गठबंधन के पहले मैंने राजनांदगांव से चुनाव लडऩे की योजना थी। संकल्प लिया था, वहां जमकर प्रचार करूंगा, चार-पांच दिन रुकूंगा। लेकिन गठबंधन के बाद दोनों दलों ने कहा उनके पास छत्तीसगढ़ में कोई स्टार प्रचारक नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तरप्रदेश में हैं। इसलिए पूरी 90 सीटों पर आपको ही प्रचार करना है। गठबंधन धर्म निभाने के लिए मुझे उनके आग्रह के सामने झुकना पड़ा। पहले मैंने कहीं से भी चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा की। उसके बाद मरवाही के लोगों का जत्था आने लगा। मैंने उन्हें समझाया कि मुझे 90 सीटों पर प्रचार करना है। उन लोगों ने कहा प्रचार के लिए आपको बुला कौन रहा है। आप नामांकन दाखिल करिए, शेष काम हम लोग कर लेंगे। मेरे पुत्र अमित जोगी, जो वहां से विधायक हैं, ने भी कह दिया कि वे मेरे और मरवाही के बीच नहीं आएंगे। मैं खुश हूं कि मरवाही से चुनाव लड़ रहा हूं।

पत्रिका- विधायक अमित जोगी के चुनाव नहीं लड़ने के पीछे की कोई विशेष रणनीति है?
अजीत जोगी- मेरा चार लोगों का छोटा सा परिवार है। मेरी पत्नी और मैं हमारी पार्टी से लड़ रहे हैं। हमारी बहू मायावतीजी की पार्टी से लड़ रही है। एक साथ बैठने पर ऐसा वातावरण बना कि यह गठबंधन कागजी नहीं है, यह दिलों का गठबंधन है। इसलिए आप अपने परिवार से एक व्यक्ति को हमारी पार्टी से लड़ाएं। तो हम तीन लडऩे वाले हो गए तो एक व्यक्ति तो ऐसा होना चाहिए जो रायपुर में बैठकर समन्वय कर सके। अब मैं चुनाव में हूं तो केवल अमित बच जाते थे, जो समन्वय कर सकें।

पत्रिका- भाजपा के प्रचार अभियान में 15 वर्ष पहले की स्थितियों यानी अजीत जोगी के मुख्यमंत्री काल का जिक्र है, जिसे वे बदहाली का प्रतीक बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस के स्टार प्रचारक भी जोगी पर ही निशाना साध रहे हैं। इसकी क्या वजह है?
अजीत जोगी- मेरा सौभाग्य है कि मैं भाजपा और कांग्रेस दोनों के निशाने पर हूं। बिना जोगी का नाम लिए, बिना जोगी पर टिप्पणी किए ये लोग रह ही नहीं सकते। संदर्भ कुछ भी हो, उसमें जोगी परिवार, अजीत जोगी, अमित जोगी अथवा रेणु जोगी का नाम आएगा। इसको मैं खराब बात नहीं मानता। उनके दिलों में, उनके दिमाग में कहीं न कहीं मैं बसा हुआ हूं। मेरे बिना उनका काम चलता नहीं है।

पत्रिका- पिछली बार के चुनाव में भी क्षेत्रीय मुद्दों की स्थिति कमोवेश यही स्थिति थी, तो क्या इसबार यह मुद्दा वोटों में तब्दील होगा?
अजीत जोगी- पिछली बार कांग्रेस के हारने का कारण बिल्कुल अलग था। हार-जीत के बीच पॉइंट 7 प्रतिशत का अंतर था, माने कुल एक लाख वोट। पिछली बार कांग्रेस से जो भूल हुई कि उसने सारे सीटिंग एमएलए को उतार दिया। छत्तीसगढ़ का इतिहास है कि सीटिंग एमएलए को सीट बचाना मुश्किल होता है। यहां सत्ता के साथ-साथ एमएलए वाइज एंटी इनकम्बेंंसी चलती है। संख्या बताऊं तो कांग्रेस ने 35 विधायकों को रिपीट किया, उसमें से 27 हार गए। कुल 8 लोग जीते, जिसमें से 2 जोगी थे। यह एक ही निर्णय कांग्रेस की हार के लिए जिम्मेदार था। अन्यथा पिछले चुनाव में ही भाजपा हार गई होती।

पत्रिका- इस बार भी कांग्रेस-भाजपा ने लगभग वही पैटर्न अपनाया है। तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
अजीत जोगी- मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन कांग्रेस ने ज्यादातर लोगों को रिपीट किया है। यह बड़ी भूल है। कांग्रेस ने इतिहास से सबक नहीं लिया। भाजपा ने अपेक्षाकृत अधिक, लेकिन पिछली बार की तुलना में कम टिकट काटे हैं। उनको हमारा डर था कि टिकट कटने से नाराज लोग जकांछ में जा सकते हैं।

पत्रिका- तो इसबार बदलाव की कितनी संभावना देख रहे हैं आप?
अजीत जोगी- परिवर्तन अवश्यंभावी है। यह होकर रहेगा। छत्तीसगढ़ के लोग इन दोनों दलों को आजमा चुके हैं। वे अब इन्हें सत्ता नहीं देना चाहते। वे अब जकांछ-बसपा के गठबंधन को विकल्प के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।

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