गोधन न्याय योजना: अब गाय के गोबर से बढ़ेगी पशुपालकों की आमदनी, इतना होगा मुनाफा

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो पशुपालकों से गोबर (Cow Dung) खरीदी करेगा। इसके लिए सरकार ने गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) बनाई है। इसकी शुरुआत हरेली पर्व से होगी।

By: Ashish Gupta

Published: 26 Jun 2020, 01:13 PM IST

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो पशुपालकों से गोबर (Cow Dung) खरीदी करेगा। इसके लिए सरकार ने गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) बनाई है। इसकी शुरुआत हरेली पर्व से होगी। पहले चरण में शासन की ओर से निर्मित 2240 गोठानों को जोड़ा जाएगा। आने वाले कुछ दिनों में करीब 2800 गोठानों का निर्माण पूरा होने के बाद यहां भी खरीदी होगी। वनांचल क्षेत्र के लिए वन अधिनियम को ध्यान में रखकर अलग से कार्ययोजना बनेगी।

भविष्य में इसे प्रदेश के सभी 20 हजार गांवों और शहरी क्षेत्रों में लागू करने की योजना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने ऑनलाइन पत्रकार वार्ता के जरिए इस योजना की घोषणा करते हुए बताया कि गोबर खरीदी से पशुपालकों को दो से तीन हजार का अतिरिक्त आय होगी। वहीं दो लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। यह योजना राज्य में अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी और इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह योजना
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में खुले में चराई की परंपरा रही है। इससे पशुओं के साथ-साथ किसानों के फसलों को भी नुकसान होता है। शहरों में आवारा घूमने वाले मवेशियों से सड़क दुर्घटनाएं होती है, जिससे जान-माल दोनों का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि गाय पालक दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ देते हैं। इस योजना के लागू होने के बाद से परीस्थितियां पूरी तरह बदल जाएगी। पशुपालक अपने पशुओं के चारे-पानी का प्रबंध करने के साथ-साथ उन्हें बांध कर रखेंगे, ताकि उन्हें गोबर मिल सके।

8 दिन में तय होगी खरीदी की कीमत
मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि गोबर खरीदी का रेट तय करने के लिए कृषि मंत्री रविंद्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्रिपरिषद की उप समिति गठित की है। इस समिति में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल शामिल किए गए हैं।

यह समिति राज्य में किसानों, पशुपालकों और गौशाला संचालकों एवं बुद्धिजीवियों के सुझावों के अनुसार 8 दिन में गोबर क्रय का दर निर्धारित करेगी। इसके अलावा गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कंपोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय की प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिवों एवं सचिवों की एक कमेटी गठित की गई है।

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