अडानी को नंदराज पहाड़ देने के लिए मृतकों से भी कराए गए हस्ताक्षर, माइनिंग ठेका रद्द

दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाजिट 13 नंबर खदान पर अडानी को माइनिंग करने का ठेका रद्द कर दिया गया है।

By: Ashish Gupta

Published: 07 Mar 2020, 04:31 PM IST

रायपुर. दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाजिट 13 नंबर खदान पर अडानी को माइनिंग करने का ठेका रद्द कर दिया गया है। राज्य सरकार ने यह फैसला दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर तोपेश्वर वर्मा द्वारा शासन को भेजी रिपोर्ट में खुलासे के बाद किया है।

दरअसल, दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रृंखला के नंदाराज पहाड़ पर स्थित एनएमडीसी की डिपाजिट 13 नंबर खदान पर अडानी को माइनिंग करने का ठेका ग्रामसभा के फर्जी प्रस्ताव के आधार पर दिया गया था, जिसमे मृतकों ने भी हस्ताक्षर किए थे। पत्रिका ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया।

सीएम भूपेश ने भी पत्रिका की खबर को ट्वीट कर कहा, सरकार बनने के बाद भी मैंने कहा था, आज पुन: दोहराता हूँ। नवा छत्तीसगढ़ में किसी भी अवैधानिक कार्य के लिए कोई भी जगह नहीं है, मेरे लिए मेरे प्रदेश की जनता प्रथम है और सदैव प्रथम ही रहेगी। आदिवासी हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।

दंतेवाड़ा कलेक्टर की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को एनएमडीसी सीएमडीसी के संयुक्त उपक्रम एनसीएल को नोटिस भेज 13 मार्च को सुनवाई के लिए तलब किया है और उक्त खनन पट्टे के लैप्स होने की बात कही है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष जून माह मे हजारों आदिवासियों ने खदान को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन छेड़ दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने समूचे खनन पट्टे की जांच के आदेश दिये थे।

मृतकों के हस्ताक्षर और फर्जी मौजूदगी
कलेक्टर की रिपोर्ट मे पाया गया है कि 4 जुलाई 2017 को ग्राम सभा के जिस प्रस्ताव के आधार पर अडानी को लौह अयस्क खदान देने का एमडीओ किया गया था। उस प्रस्ताव पर मृतकों ने भी हस्ताक्षर किए थे। रिपोर्ट कहती है कि उक्त कार्यवाही विवरण मे उल्लेखित सुक्का, हड़मा, डोका, पांडु, गुंडरू, पीले, चुले जैसे नाम वाले व्यक्तियों की मौत बैठक से पहले ही हो चुकी थी। वहीं दस नाम ऐसे पाए गए जिनहोने कार्यवाही रजिस्टर मे तो अंगूठा लगाया था लेकिन शपथपूर्वक बयान देते समय उन ग्रामीणों ने अपने दस्तखत किए। वही दो व्यक्ति ऐसे रहे जिन्होने कार्यवाही रजिस्टर मे हस्ताक्षर किए लेकिन शपथपूर्वक बयान देते समय अंगूठे लगाए।

सरपंच और ग्रामीणों ने दिया बैठक न होने का हलफनामा
कलेक्टर द्वारा 5 मार्च को शासन को भेजे गए पत्र मे कहा गया है कि 4 जुलाई 2017 को हिरोली गाँव मे जिस ग्राम सभा की बैठक की कार्रवाई के आधार पर पट्टे की जमीन एनसीएल को दी गई थी, उक्त ग्रामसभा की बैठक होने की बात से ही तत्कालीन सरपंच बुधरी कुंजाम ने इंकार कर दिया। वहीं अकेले ग्राम पंचायत सदस्य बसंत कुमार नायक का कहना था कि उक्त बैठक हुई है।

कलेक्टर की रिपोर्ट मे कहा गया है कि उक्त कार्रवाई मे अनुसूचित क्षेत्र के संबंध मे बने हुए नियमों का कोई पालन नहीं किया गया था न तो एक तिहाई सदस्यों से लिखित माँगपत्र लिया गया न ही कोई लिखित आदेश जारी किया गया। जबकि नियमों के हिसाब से ग्राम सभा के एक एक सदस्य को एक सप्ताह पहले ही इसकी जानकारी दी जानी थी।

राज्य सरकार ने भी भेजा एनसीएल को नोटिस
5 मार्च को एनसीएल को खनिज संसाधन विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस मे कहा गया है कि अनुबंध के दो वर्षों के भीतर खनन पट्टे मे कार्य प्रारम्भ नहीं किया गया। नोटिस कहती है कि अनुबंध की तिथि से तीसरे वर्ष 30 प्रतिशत उत्पादन किया जाना था, लेकिन यह भी नहीं हो पाया। शासन ने नोटिस मे कहा है कि अगर उक्त खदान का संचालन सही समय से होता तो राज्य के लौह अयस्क आधारित उद्योगों को कच्चे माल की प्राप्ति हो सकती थी, ऐसे मे नियमों के मुताबिक उक्त पट्टा लैप्स होने की श्रेणी मे आ गया है।

बैलाडीला के डिपाजिट 13 में 315.813 हेक्टेयर रकबे में लौह अयस्क खनन के लिए वन विभाग ने वर्ष 2015 में पर्यावरण क्लियरेंस दिया है। जिस पर एनएमडीसी और राज्य सरकार की सीएमडीसी को संयुक्त रूप से उत्खनन कार्य करना था। इसके लिए राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार के तहत संयुक्त उपक्रम एनसीएल का गठन किया गया था, लेकिन बाद में इसे निजी कंपनी अडानी एंटरप्राइजेस लिमिटेड को 25 साल के लिए लीज हस्तांतरित कर दिया गया।

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