कुपोषण पर अंकुश: छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध करा रही है अंडे और बाजरा

  • फरवरी 2019 की तुलना में जुलाई 2021 में कुपोषण में 15.73 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई
  • 2019 में कुपोषित बच्चों की संख्या 19,572 थी, जो 2021 में घटकर 11,440 हो गई

By: ashutosh kumar

Published: 10 Sep 2021, 09:51 PM IST

नई दिल्ली. छत्तीसगढ़ ने नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल कोंडागांव जिले में कुपोषण को दूर करने के लिए एक नया तरीका अपनाया है। प्रशासन ने जिले में अंडा उत्पादन इकाई स्थापित की है ताकि बच्चों को प्रोटीन युक्त भोजन मिल सके। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि बच्चों को रोजाना पांच हजार अंडे मिल रहे हैं। अब दूसरी यूनिट भी लगाई जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रागी और कोडो से पौष्टिक भोजन तैयार किया जा रहा है।

  • कलेक्टर खुद करते है अभियान की निगरानी
    जिले की सभी आंगनबाडिय़ों को करीब 220037 अंडे और 35422 किलो मोटे अनाज की आपूर्ति की जा चुकी है। अंडे और अनाज को बच्चों तक पहुंचाने के लिए वॉट्सएप ग्रुप बनाया गया है, बच्चों को खिलाए जा रहे भोजन की तस्वीर ग्रुप में पोस्ट की जाती है। इसकी निगरानी खुद कलेक्टर करते हैं। बस्तर संभाग से 80 किमी दूर कोंडागांव जिला नक्सल गतिविधियों और आदिवासी बहुलता के कारण विकास की मुख्य धारा से दूर रहा है। ऐसे में यहां के गांवों में कुपोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो गई हैं।
  • जून 2020 में 'नंगत पिला' (स्वस्थ बच्चा) परियोजना शुरू की गई थी
    राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2019 तक जिले में 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 37 प्रतिशत बच्चे कुपोषित थे। महामारी के दौर में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती कुपोषण को नियंत्रित करना था। जिला कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि पोषण अभियान के तहत जून 2020 में 'नंगत पिला' (स्वस्थ बच्चा) परियोजना शुरू की गई थी। परियोजना के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। जिले में कुपोषित बच्चों की पहचान के लिए जुलाई 2020 में बेसलाइन स्क्रीनिंग शुरू की गई थी और 12,726 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई थी।
  • कुपोषण की दर में आई कमी
    मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत जिले में फरवरी 2019 की तुलना में जुलाई 2021 में कुपोषण में 15.73 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। 2019 में कुपोषित बच्चों की संख्या 19,572 थी, जो 2021 में घटकर 11,440 हो गई। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में, सरकार ने 1438 'सुपोषण मित्र' नियुक्त किए हैं, जहां प्रत्येक नोडल अधिकारी एक ग्राम पंचायत की देखरेख करता है। ऐसे 328 नोडल अधिकारियों ने कार्यक्रम की निगरानी के लिए 418 दौरे किए। कलेक्टर मासिक समीक्षा बैठकों के माध्यम से इस डाटा बेस की प्रगति की समीक्षा करते हैं। इन बैठकों में अगले महीने की कार्ययोजना भी तय की जाती है।
  • (आईएएनएस)
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