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छत्तीसगढ़ सरकार ने VIP हेलीकॉप्टर के लिए निकाला ग्लोबल टेंडर, हर साल चुकाएगी करीब 35 करोड़ रुपए

Global Tender Helicopters: छत्तीसगढ़ सरकार प्रशासनिक दौरों, VIP मूवमेंट और आपातकालीन सेवाओं के लिए नया हेलीकॉप्टर किराए पर लेगी। हर साल करीब 35 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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Chhattisgarh Govt Helicopter

सरकार किराए पर लेगी हेलीकॉप्टर (फोटो सोर्स: पत्रिका)

Chhattisgarh Govt Helicopter: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक दौरों, संवेदनशील क्षेत्रों के निरीक्षण और आपातकालीन वीआईपी सेवाओं को और तेज एवं प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य का विमानन विभाग अब एक नया अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर किराए पर लेने जा रहा है। इसके लिए Government e-Marketplace (GeM) के माध्यम से 105 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला ग्लोबल टेंडर जारी किया गया है। मौजूदा हेलीकॉप्टर सेवा का अनुबंध समाप्त होने वाला है, जिसके बाद सरकार नई तकनीक और बेहतर सुविधाओं वाले हेलीकॉप्टर को सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रही है।

आसमान में चलता-फिरता ‘वीआईपी दफ्तर’

सरकार जिस नए हेलीकॉप्टर को किराए पर लेने जा रही है, वह पूरी तरह वातानुकूलित होगा और उसमें विश्वस्तरीय वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। हेलीकॉप्टर में कम से कम 8 लोगों के बैठने की क्षमता होगी, ताकि मुख्यमंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा दल एक साथ यात्रा कर सकें। राज्य के बड़े हिस्से—खासकर Bastar और Surguja जैसे दूरस्थ व संवेदनशील इलाकों—तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

क्यों नहीं खरीदती सरकार अपना हेलीकॉप्टर?

हर बार हेलीकॉप्टर किराए पर लेने पर उठने वाले सवालों के बीच इसका आर्थिक गणित भी सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सरकार इसी श्रेणी का नया ट्विन-इंजन, 8-सीटर, वीआईपी इंटीरियर वाला हेलीकॉप्टर खरीदती है, तो उसकी कीमत करीब 45 से 60 करोड़ रुपये तक हो सकती है। लेकिन खरीदने के बाद उसका संचालन, बीमा, तकनीकी जांच, स्पेयर पार्ट्स और नियमित रखरखाव का खर्च अलग से जुड़ जाता है, जो लंबे समय में सरकार पर बड़ा वित्तीय बोझ बन सकता है।

रखरखाव और स्टाफ पर करोड़ों का अतिरिक्त खर्च

हेलीकॉप्टर खरीदने का मतलब सिर्फ विमान खरीदना नहीं है, बल्कि पूरा एविएशन सिस्टम खड़ा करना भी है। इसके लिए सरकार को अलग एविएशन विंग सक्रिय रखना होगा। वीआईपी उड़ानों के लिए अनुभवी पायलट और को-पायलट चाहिए, जिनकी मासिक सैलरी 3 से 7 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा केबिन क्रू, इंजीनियर, ग्राउंड स्टाफ और तकनीकी टीम का खर्च भी करोड़ों तक पहुंच सकता है।

‘वेट लीज’ मॉडल पर होगा 3 साल का अनुबंध

सरकार ने इस बार हेलीकॉप्टर को ‘वेट लीज’ मॉडल पर लेने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने वाली निजी कंपनी ही पायलट, केबिन क्रू और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संभालेगी। इस मॉडल से सरकार को तकनीकी झंझटों से राहत मिलेगी और उसे केवल सेवा का उपयोग करना होगा। यह अनुबंध 3 वर्षों के लिए होगा, जिसमें हर महीने कम से कम 20 दिन उड़ान की उपलब्धता तय की गई है।

3 जून को खुलेगी तकनीकी बोली

सरकार ने निविदा में कंपनियों के लिए सख्त वित्तीय और तकनीकी मानक तय किए हैं। बोली लगाने वाली कंपनी का पिछले 3 वर्षों का औसत सालाना टर्नओवर कम से कम 5 करोड़ रुपये होना जरूरी है। साथ ही संबंधित कंपनी को वीआईपी एविएशन सेवाओं में कम से कम 5 वर्षों का अनुभव भी होना चाहिए। इच्छुक कंपनियां 3 जून 2026 को दोपहर 2 बजे तक आवेदन जमा कर सकेंगी, जिसके बाद तकनीकी बोली खोली जाएगी।

प्रशासनिक पहुंच और आपदा प्रबंधन दोनों होंगे मजबूत

विशेषज्ञों का मानना है कि नया हेलीकॉप्टर सिर्फ वीआईपी मूवमेंट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन, मेडिकल इमरजेंसी, रेस्क्यू ऑपरेशन और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रशासनिक पहुंच के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। इस कदम से छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशासनिक क्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली दोनों को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।