गरीब बच्चों की फीस देने सरकार के पास नहीं है पैसे, 163 करोड़ रुपए है बकाया

गरीब बच्चों की फीस देने सरकार के पास नहीं है पैसे, 163 करोड़ रुपए है बकाया

Chandu Nirmalkar | Publish: Aug, 13 2019 03:27:02 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

Chhattisgrh govt: ऐसे बच्चों को अपनी संस्थाओं में नि:शुल्क प्रवेश सरकार से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति के भरोसे ही दिया था

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh govt) में गरीब बच्चों की पढ़ाई उधार के भरोसे चल रही है। हालात यह है कि सरकार (Chhattisgarh CM) के पास गरीब बच्चों की फीस देने के लिए भी पैसे नहीं है। जबकि निजी स्कूलों (Private school) ने शिक्षा का अधिकार (Right to education) के तहत ऐसे बच्चों को अपनी संस्थाओं में नि:शुल्क प्रवेश सरकार से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति के भरोसे ही दिया था।

पिछले तीन साल में सरकार पर निजी स्कूलों का 163.44 करोड़ रुपए बकाया है। ऐसे में फंड के अभाव में कक्षा 9वीं से 12वीं तक गरीब विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना भी खटाई में पड़ती नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया था। छह वर्ष से 14 वर्ष आयु तक के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश देने का प्रावधान किया गया है। उनकी संख्या सीटों के 25 प्रतिशत तक निर्धारित है। बच्चों के अभिभावकों की जगह स्कूल का शुल्क राज्य सरकार अदा करती है। सरकार, पिछले कुछ सालों से लॉटरी के जरिए गरीब बच्चों को प्रवेश तो दिला रही है, लेकिन स्कूलों को दिए जाने वाले भुगतान का मामला लगातार पिछड़ता जा रहा है। शिक्षा का अधिकार के तहत राज्य सरकार को वर्ष 2016-17 में निजी स्कूलों 60 करोड़ 40 लाख रुपए देने थे। इसके एवज में 54 करोड़ 2 लाख रुपए का ही भुगतान किया गया है। वर्ष 2017-18 में 98 करोड़ 98 लाख के भुगतान के एवज में 56 करोड़ 19 लाख रुपए और वर्ष 2018-19 में 132 करोड़ 79 लाख के एवज में मात्र 14 करोड़ 22 लाख का ही भुगतान किया गया है।

खाली रह जाती है आरक्षित सीटें
प्रदेश में शिक्षा के अधिकार को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां कानून के तहत निजी स्कूलों के जितनी सीट आरक्षित है, वे भी पूरी नहीं भर पाती है। वर्ष 2016-17 में निजी स्कूलों में 64 हजार 962 सीट आरक्षित थी, लेकिन 38 हजार 232 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया था। वर्ष 2017-18 में 84 हजार 204 सीटों के विरुद्ध 42 हजार 297 और वर्ष 2018-19 में 90 हजार 57 सीट के विरुद्ध 45 हजार 347 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। विभागीय अधिकारियों की मानें तो आरक्षित सीट के मुकाबले बच्चे प्रवेश के लिए आवेदन नहीं करते हैं। इस वजह से आरक्षित सीटें खाली रह जाती है।

केंद्र पर ज्यादा निर्भर
फंड मामले में राज्य सरकार को केंद्र सरकार पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता है। केंद्र से फंड कम मिलने या देरी से मिलने के कारण निजी स्कूलों का भुगतान अटक जाता है। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार ने पहले बच्चों को नर्सरी से शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्रवेश देने के लिए कहा था। बाद में वह पलट गया।

अलग-अलग फीस
पहलीं से 5वीं तक
7000 रुपए
कक्षा 6वीं से 8वीं तक
11000 रुपए
कक्षा 9वीं से 12वीं तक
15000 रुपए
(राशि प्रति विद्यार्थी)

तीन वर्षों में आरटीई में दाखिला
वर्ष आरक्षित सीट प्रवेशित विद्यार्थी
2016-17 64,962 38,232
2017-18 84,204 42,297
2018-19 90,057 45,347
तीन वर्षों में भुगतान (राशि रुपए में)

वर्ष भुगतान होना था भुगतान हुआ
2016-17 60,40,98,690 54,02,50,324
2017-18 98,98,41,465 56,49,83,277
2018-19 132,79,24,884 14,22,31,302

 

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों के लिए 20 करोड़ रुपए का फंड जारी किया गया है। निजी स्कूलों को इस राशि का भुगतान किया जाएगा।
एस. प्रकाश, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

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