scriptChhattisgarh govt officers pleasure of government car in Rs 250 | पत्रिका एक्सक्लूसिव: लाखों की सैलरी पाने के बाद भी वाहन शुल्क नहीं कटवा रहे कुछ अफसर | Patrika News

पत्रिका एक्सक्लूसिव: लाखों की सैलरी पाने के बाद भी वाहन शुल्क नहीं कटवा रहे कुछ अफसर

- सरकारी गाड़ी का सुख 250 रुपए में, कर्मचारियों को सिर्फ 100 रुपए वाहन भत्ता.

रायपुर

Published: October 29, 2021 12:39:40 pm

रायपुर. राज्य सरकार एक तरफ जहां अधिकारियों को 8 से 20 लाख रुपए के वाहन सिर्फ 250 रुपए में पूरे माह के लिए उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर शासकीय कर्मचारियों को वाहन भत्ते के रूप में सिर्फ 100 रुपए प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। इसके अलावा अधिकारियों की गाडिय़ों में लगने वाला डीजल-पेट्रोल और मरम्मत, टायर-ट्यूब का खर्चा भी सरकार वहन कर रही है। राज्य सरकार की सुविधा से अधिकारी वर्ग तो खुश है, लेकिन कर्मचारी वर्ग इस असमानता से दुखी है।

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जानकारी के अनुसार अधिकारियों को शासकीय वाहन आवंटित होने पर राज्य सरकार द्वारा मात्र 250 रुपए प्रतिमाह उनके वेतन से कटौती की जाती है। अधिकारियों के वाहन का उसके अतिरिक्त परिवार के सदस्यों द्वारा भी कई बार उपयोग किया जाता है। इस आवंटित वाहन में प्रतिमाह नवा रायपुर मंत्रालय-संचालनलय में पदस्थ अफसरों को 250 लीटर डीजल-पेट्रोल शासन द्वारा ही उपलब्ध कराया जाता है। मुख्यालय से बाहर होने पर अतिरिक्त ईंधन भी दिया जाता है। एक तो लाखों रुपए के वाहन अधिकारी को आवंटित करना और ऊपर से डीजल-पेट्रोल के रूप में हर माह हजारों रुपए खर्च करने के साथ टूट-फूट, टायर-ट्यूब व सर्विसिंग भी राज्य शासन की राशि से ही कराई जाती है। सूत्र बताते हैं कि कई विभागों में पदस्थ अधिकारी तो 250 रुपए न्यूनतम राशि भी वेतन से न कटे, इसलिए वे वाहन अपने नाम न कराकर संबंधित विभाग के नाम पर आवंटित कराकर वाहन का उपयोग करते हैं।

अफसरों के पास चार से पांच वाहन
वर्तमान में कुछ अफसरों के पास चार-पांच विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में हर विभाग का अफसर के लिए एक-एक वाहन आवंटित कराए गए हैं। जबकि एक ही अफसर उस गाड़ी का उपयोग करते हैं। जिस अफसर को तीन-चार विभागों की जिम्मेदारी दी गई है, उसे एक ही वाहन का उपयोग करना चाहिए, ताकि राज्य शासन की राशि की बचत भी होगी। लेकिन अफसर अपनी अफसारशाही में किसी प्रकार की कमी न हो इसलिए अपने घर पर ही सभी विभागों के वाहन खड़े रखते हैं।

किराए के वाहन पर 25 से 30 हजार रुपए खर्च
कुछ ऐसे विभाग है जहां विभाग खुद किराए पर वाहन चला रहे है। इस पर 25 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह खर्च किया जाता है। इन विभागों में जिन अधिकारियों को वाहन की पात्रता नहीं है, उसे तक वाहन विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया है। जिसमें नगरीय निकायों में सबसे अधिक वाहन किराए पर लिए गए हैं।

फैक्ट फाइल

- स्टेट गैरज से अधिकारियों को आवंटित वाहन - 200 के करीब ।

- ड्राइवर (स्थाई) पर - 20 से 30 हजार रुपए।
- प्लेसमेंट ड्राइवर पर - 10 से 15 हजार रुपए ।

- मरम्मत-टायर-ट्यूब व बैटरी पर होने वाला खर्च - दो से तीन लाख रुपए प्रतिवर्ष।
- पेट्रोल-डीजल पर व्यय एक वाहन पर - 25 से 30 हजार रुपए ।

ये सच है कि वाहनों के उपयोग के मामले में अधिकारियों को सारी सुविधाएं शासन द्वारा दी जा रही है, लेकिन कर्मचारियों को मात्र 100 रुपए वाहन भत्ता दिया जा रहा है। जबकि वर्तमान में एक लीटर पेट्रोल 104 रुपए में मिल रहा है। इस पर विचार करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
- महेंद्र सिंह राजूपत, अध्यक्ष, मंत्रालयीन कर्मचारी संघ

जिन अधिकारियों को वाहन आवंटित किए गए हैं, उनके वेतन से राशि काटी जाती है। कितनी राशि है इस बारे में जानकारी नहीं है। यदि संशोधित करने की जरूरत हैं, तो इसे दिखवाना पड़ेगा। जो लोग न्यूनतम शुल्क भी नहीं दे रहे हैं, इस बारे में संबंधित विभाग से जानकारी ली जाएगी। जिनके पास चार-पांच वाहन हैं, उसे भी दिखवाता हूं।
- ताम्रध्वज साहू, गृह मंत्री छग

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